श्रावस्ती। चौदह साल पहले सोनवा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी दो नाबालिग चचेरी बहनों को बहला फुसला कर भगाने के मामले में कोर्ट ने एक आरोपी को दोषी करार मानते हुए तीन साल की कैद व 10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले में चार आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। इनमें से एक आरोपी की मामले की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि सोनवा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ने 18 मार्च 2009 को सोनवा थाने में शिकायत दर्ज कराथथी कि उसकी व भाई की नाबालिग बेटियों को 17 मार्च की रात सिरसिया थाना क्षेत्र के शाहपुर पूरे शिवदीन निवासी मुन्ना उर्फ भूरे उर्फ अशफाक पुत्र जाहिद अली अपने ही गांव के राम उजागर यादव पुत्र राम प्रगट यादव व नासिरगंज निवासी दानिश पुत्र पुत्तन के सहयोग से बहला फुसलाकर भगा ले गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों के विरुद्ध अपहरण व दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में न्यायालय पर आरोप पत्र भेजा था।
विचारण के दौरान न्यायालय ने पीड़ित पिता की शिकायत पर दिनेश कुमार मिश्रा लेखपाल, शिव प्रसाद व बबलू को भी तलब किया था। दौरान मुकदमा एक आरोपी शिव प्रसाद की मृत्यु हो गई। अपर सत्र न्यायाधीश करुणा सिंह ने इस मामले में आरोपी मुन्ना उर्फ भूरे उर्फ अशफाक को अपहरण के मामले में दोषी करार मानते हुए तीन वर्ष की कैद व दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई जबकि चार अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।