तुलसीपुर (श्रावस्ती)। वन विभाग ने नाबालिगों के नन्हें हाथों में मजदूरी के लिए फावड़ा पकड़ा दिया। अवसान कुंडी बीट में इन नाबालिगों से पौध की नर्सरी तैयार कराई जा रही है। बच्चों पर नर्सरी की मिट्टी तैयार करने से लेकर पौध उगाने तक का जिम्मा है। जंगल के अंदर पूरी तरह से जंगलराज है। यहां बाल श्रम कानूनों को दरकिनार करके बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है। हरदत्त नगर गिरंट वन क्षेत्र के अवसान कुंडी बीट में ऐसा नजारा देखने को मिला। इस बीट में पौधरोपण के लिए पौधों को तैयार कराया जा रहा है। नर्सरी सड़क के किनारे ही है। यहां पौध की मिट्टी बनाने से लेकर पौध तैयार करने की जिम्मेदारी नाबालिग बच्चों के हाथों में है। ये बच्चे सुबह होते ही स्कूल जाने के बजाए नर्सरी में जाते हैं। दिन भर फावड़ा लेकर मिट्टी खोदते हैं। इसके बाद एक रुपये प्रति बैग की दर से वे मिट्टी पॉलीथिन में भरते हैं। इसके बाद बनीं क्यारियों में मिट्टी से भरे बैग को रखा जाता है। औसतन एक बच्चा दिन भर में 60 से 70 बैग तैयार कर पाता है। पूरी क्यारी भरने के लिए 200 रुपये मिलते हें।
जंगल को हरा-भरा करने के चक्कर में बच्चों का बचपन सूख रहा है। पूरे दिन खटने के बाद उनके चेहरे पर मुस्कान न होकर मजदूर की तरह थकावट देखने को मिलती है। हरदत्त नगर गिरंट के वनाधिकारी भगवान सिंह ने बताया कि इस संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है। हो सकता है वहां मौजूद लोग बच्चों से कार्य करा रहे हों।