मजगवां गांव में बाढ़ के पानी से डूबी धन की फसल
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श्रावस्ती। जिले में विगत एक सप्ताह से आफत की बरसात हो रही है। यह बरसात सोमवार को भी जारी रही। मूसलाधार बरसात के कारण राप्ती नदी सहित पहाड़ी नालों में आई बाढ़ ने फसलों को डुबो दिया। जिन क्षेत्रों में बाढ़ नहीं आई। वहां चली तेज हवा के साथ हुई बारिश ने फसलों को जमीदोज कर दिया। जिससे खेतों में लगी धान की फसल को जहां आधे से अधिक का नुकसान बताया जा रहा है।
वहीं मक्का को 60 प्रतिशत, अरहर को 30 प्रतिशत व तिल को 40 प्रतिशत सहित सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान बताया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी कम हो रहा है। वहां अब फसलों पर कीट-पतंगों का प्रकोप देखा जा रहा है। ऐसे में किसानों को अपनी पूंजी डूबने की चिंता सता रही है। जानकारों की मानें तो बाढ़ व पानी में डूबी फसलें तो खराब होंगी ही। पैदावार भी प्रभावित होगी। वहीं अगेती प्रजाति के धान की फसल को नुकसान होना तय है। जिसकी पैदावार कम होने के साथ ही उसे बाजार में अच्छा मूल्य भी नहीं मिलेगा।
एहतियात बरतें किसान अन्यथा और होगा नुकसान
मौजूदा समय में फसलों को विभिन्न बीमारियों व कीट-पतंगों से बचाने के लिए किसान एहतियात बरतें। अन्यथा उन्हें और नुकसान होगा। खेत खलिहानों में जलभराव होने के कारण चूहे खेतों से पलायन करके घरों में चले गए हैं। उनको रोकने के लिए अन्न भंडारण के लिए पक्का, कंकरीट व धातु के बने पात्रों का प्रयोग करें। इनसे मनुष्यों में स्क्रब टाईफस तथा लेप्टोस्पायरोसिस की बीमारी भी हो सकती है। घरों में चूहा नियंत्रण के लिए लोग कृषि रक्षा रसायनों का सावधानी पूर्वक प्रयोग करें। चूहे के मरने के बाद उसे जमीन के अंदर दबा दें।
48 घंटे में किया जा रहा समस्या का निदान
कृषि विभाग की सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के तहत किसानों की समस्याओं का निस्तारण 48 घंटे के अंदर किया जा रहा है। किसान अपनी फसलों में लगने वाले कीट व रोग सहित अन्य समस्या के लिए मोबाइल नंबर 9452247111 व 9452257111 पर फोन कर समस्या से निजात पा सकते हैं। -विजय कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी