बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में दर्शन-पूजन करते थाईलैंड के अनुयायी।
- फोटो : बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में दर्शन-पूजन करते थाईलैंड के अनुयायी।
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 30 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान आयोजित बौद्ध सभा में भिक्षु देवानंद ने भगवान बुद्ध और एक किसान के बीच हुए संवाद का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि एक बार बुद्ध भिक्षा के लिए एक किसान के पास पहुंचे। किसान ने बुद्ध से कहा कि उन्हें भी हल जोतना और बीज बोना चाहिए। इस पर बुद्ध ने उत्तर दिया कि वे भी खेती ही करते हैं। किसान ने जिज्ञासावश बुद्ध से अपनी खेती के बारे में पूछा। बुद्ध ने समझाया कि उनके पास श्रद्धा का बीज, तपस्या रूपी वर्षा और प्रजा रूपी जोत व हल है। साथ ही पापभीरुता का दंड, विचार रूपी रस्सी और स्मृति व जागरूकता रूपी हल की फाल उनके उपकरण हैं। बुद्ध ने कहा कि वे वचन और कर्म में संयत रहते हुए आनंद की फसल काट लेने तक प्रयत्नशील रहते हैं।