कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को म्यांमार से आए 58 सदस्यीय दल से गुलजार रही। दल ने जेतवन स्थित गंध कुटि पर विशेष प्रार्थना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में बौद्ध सभा का भी आयोजन हुआ।
बौद्ध भिक्षु ने कहा कि बुद्ध के अनुसार मानव जीवन दुखों से परिपूर्ण है। उन्होंने जन्म और मरण चक्र को दुखों का मूल कारण माना। किसी भी धर्म का मकसद मानव को इस जन्म और मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाना होना चाहिए। बुद्ध ने दुख होने के कारण बताए। दुख निरोध के लिए तृष्णा का उन्मूलन आवश्यक है। संसार में प्रिय लगने वाली वस्तुओं की इच्छा त्यागना ही दुख निरोध के मार्ग की ओर ले जाता है। बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग को इसके लिए उपयुक्त बताया। अष्टांगिक मार्ग सम्यक दृष्टि, सत्य तथा असत्य को पहचानने कि शक्ति सम्यक संकल्प इच्छा एवं हिंसा रहित संकल्प सम्यक वाणी, सत्य एवं मृदु वासम्यक कर्म, सत्कर्म, दान, दया, सदाचार व अहिंसा इत्यादि सम्यक आजीव, जीवन यापन का सदाचार पूर्ण एवं उचित मार्ग सम्यक व्यायाम, विवेकपूर्ण प्रयत्न सम्यक स्मृति, अपने कर्मों के प्रति विवेकपूर्ण ढंग से सजग रहने की शिक्षा देता है। बुद्ध के अनुसार इन मार्गों का पालन करने से मनुष्य कि तृष्णा खत्म हो जाती है और मनुष्य को निर्वाण प्राप्त हो जाता है। इसके बाद सभी उपासकों ने तपोस्थली का भ्रमण किया। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक व उपासिकाएं मौजूद रहीं।