कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को अनुयायियों से गुलजार रही। महाराष्ट्र से आए बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटी पर विशेष प्रार्थना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध को जिस साधना से बोधि की प्राप्ति हुई उसे विपश्यना कहते हैं। विपश्यना यानी आत्मनिरीक्षण के लिए अपने भीतर की ओर देखना। बुद्ध ने इस विद्या को भी अपना आविष्कार या उपलब्धि नहीं माना। उन्होंने बस इतना कहा कि मुझसे पहले के जिन बुद्धों व अर्हतों ने जिस तरह स्वयं को जाना था। मैंने भी उसी विधि से स्वयं को जान लिया है। मुझे उस तरीके का ज्ञान हो गया है। तुम चाहो तो तुम्हें भी मैं वह तरीका बता सकता हूं। जिस तरह मुझमें यह मैत्री जागी है, वैसे ही तुममें भी यह मैत्री जाग जाए। तुम भी बुद्ध बन जाओ और फिर तुम भी बुद्ध बनने का यह मार्ग सबको बताओ। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु भंवरा नद, धम्म सागर, ज्ञान लोक, नाग लोक, नाग रत्न आदि मौजूद रहे। संवाद