कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में मंगलवार वियतनाम से आए उपासकों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में गंध कुटी पर प्रार्थना कर विश्व शांति की कामना की।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध के अनुसार मानव जीवन दुखों से परिपूर्ण है। प्रथम आर्य सत्य में बुद्ध ने बताया कि संसार में सभी वस्तुएं दुखमय है। उन्होंने जन्म और मरण के चक्र को दुखों का मूल कारण माना। दूसरे आर्य सत्य में बुद्ध ने दुख के अनेक कारण बताए। इन सभी कारणों का मूल तृष्णा को बताया। तीसरे आर्य सत्य के अनुसार दुख निरोध के लिए तृष्णा का उन्मूलन आवश्यक है। चौथे आर्य सत्य में बुद्ध ने दुख निरोध के मार्ग को बताया है।
बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग को इसके लिए उपयुक्त बताया। बुद्ध के अनुसार अष्टांगिक मार्ग का पालन करने से मनुष्य कि तृष्णा खत्म हो जाती है और मनुष्य को निर्वाण प्राप्त हो जाता है। बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति सरल बनाने के लिए दस शीलों पर बल दिया। जिसमें अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (किसी प्रकार की संपत्ति न रखना), मध सेवन न करना, असमय भोजन न करना, सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना, धन संचय न करना, स्त्रियों से दूर रहना व नृत्य गान आदि से दूर रहना आदि शामिल हैं। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक उपासिकाएं मौजूद रहे।