श्रावस्ती। लंपी स्किन डिजीज एक विषाणु जनित रोग है। यह वायरल त्वचा रोग है जो मुख्य रूप से जानवरों को प्रभावित करता है। यह खून चूसने वाले कीड़ों जैसे मक्खियों, मच्छरों की कुछ प्रजातियों और किलनी से फैलता है। पशुओं को इससे बचाने को लेकर एडवायजरी जारी की गई है।
रविवार को सीवीओ डाॅ. मानव ने लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए एडवायजरी जारी की। उन्होंने बताया कि पशुओं को तेज बुखार, आंख व नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन, पूरे शरीर में कठोर, चपटी गांठ आदि लंपी के शुरुआती लक्षण हैं। कभी-कभी पूरे शरीर की चमड़ी विशेष रूप से सिर, गर्दन, थूथन, थनों, गुदा पर गांठों के उभार बन जाते हैं। कभी पूरा शरीर गांठों से ढक जाता है।
गांठे (नोड्यूल) नेक्रोटिक और अल्सरेटिव भी हो सकते हैं। इससे मक्खियों द्वारा अन्य स्वस्थ पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर रूप से प्रभावित जानवरों में नैकोटिव घाव, श्वसन और जठरांत्र में भी विकसित हो जाते हैं।
श्वसन पथ में घाव होने से सांस लेने में कठिनाई होती है, पशुओं का वजन घट जाता है। शरीर कमजोर हो जाता है एवं अत्यधिक कमजोरी से पशु की मृत्यु भी हो सकती है। गर्भवती पशुओं में गर्भपात हो सकता है, दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन में कमी आदि लक्षण हो सकते हैं। इस रोग के समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।