कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में रविवार से विशेष वर्षावास पूजा हुई। श्रीलंका से आए बौद्ध भिक्षुओं ने गंधकुटी व जेतवन में अपने रीति-रिवाज से बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महा थेरो के नेतृत्व में वर्षावास पूजा की।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महा थेरों ने कहा कि वर्षावास पूजा का बौद्ध धर्म में विशेष महत्व है। यह परंपरा भगवान बुद्ध के जीवन काल से चली आ रही है। इस दौरान बौद्ध भिक्षु एक स्थान पर रुक कर ध्यान करते हैं। यह पूजा बौद्ध धर्म की सबसे बड़ी पूजा है। भगवान बुद्ध ने श्रावस्ती में 24 वर्ष आवास किया था। इसलिए यहां देश-विदेश से लोग वर्षावास पूजा करने के लिए आते हैं। भगवान बुद्ध का कहना था कि जियो और जीने दो, आपस में प्रेम रखो और अपने आप को पहचानो, इसी में जीवन की भलाई है। इस दौरान काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।
दुनिया में खराब कर रहे देश की छवि
बौद्ध तपोस्थली के आसपास घुमंतू जाति सहित अन्य जातियों के लोग एकत्र रहते हैं। जो तपोस्थली आने वाले अनुयायियों से भीख मांगते हैं। इसके बावजूद स्थानीय व पर्यटन पुलिस, तहसील प्रशासन तथा पुरातत्व विभाग ध्यान नहीं दे रहा। इससे देश की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस पर ध्यान न देने से बौद्ध भिक्षुओं में नाराजगी है।