जेतवन परिसर की परिक्रमा करते श्रीलंका के अनुयायी।
- फोटो : जेतवन परिसर की परिक्रमा करते श्रीलंका के अनुयायी।
कटरा। श्रीलंका के अनुयायियों का 40 सदस्यीय दल रविवार को दर्शन-पूजन के लिए बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक के नेतृत्व में बुद्ध की प्रतिमा हाथ में लेकर पारंपरिक तरीके से जेतवन परिसर में परिक्रमा की। इस दौरान बौद्ध सभा भी हुई। इसमें भिक्षु दीपालोक ने कहा कि बुद्ध दर्शन में संवेदनशीलता भी प्रमुख विचार है, जिसका तात्पर्य दूसरों के दुखों को अनुभव करने की क्षमता से है। वर्तमान में मनोविज्ञान जिसे समानुभूति कहता है, वो वही है जिसे भारत में संवेदनशीलता कहा जाता रहा है। बुद्ध दर्शन का छठा प्रमुख विचार हृदय परिवर्तन के विश्वास से संबंधित है। बुद्ध को इस बात पर अत्यधिक विश्वास था कि हर व्यक्ति के भीतर अच्छा बनने की संभावनाएं होती हैं।