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थानाध्यक्ष का खेल, जीवित गवाह को बना दिया मृत

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श्रावस्ती। जिम्मेदारी से बचने के लिए पुलिस वाले जिंदा को भी मुर्दा बता देने से नहीं हिचकते। ऐसा ही एक मामला गिलौला थाना क्षेत्र में सामने आया है। इसमें थानाध्यक्ष ने एक मामले में गवाह जीवित को मुर्दा बताकर इसकी रिपोर्ट भी न्यायालय में दाखिल कर दी। इसका खुलासा होने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर जिला जज ने सख्त नाराजगी जताते हुए लापरवाही बरतने वाले थानाध्यक्ष पर कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक सहित डीएम व एसपी को पत्र लिखा है।
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इस मामले में अभियोजन की पैरवी कर रहे अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 से गिलौला थाने के पटखौली गांव का एक मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है। इसके निस्तारण के लिए अपर जिला जज अजय सिंह की ओर से गवाह जोखन , छेदी व ओरी लाल को गिलौला पुलिस से न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के जवाब में गिलौला पुलिस ने न्यायालय को भेजी अपनी रिपोर्ट में बताया कि उपरोक्त सभी साक्षी की मृत्यु हो चुकी है। इनका मृत्यु प्रमाण पत्र ग्राम प्रधान श्रीदेवी की तरफ से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। सोमवार को वाद की सुनवाई के दौरान इसी मामले से जुड़ा गवाह बलिराम वर्मा अपने अधिवक्ता राम प्रसाद यादव के साथ कोर्ट में उपस्थित हुआ।
अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि जोखन पुत्र श्रीराम जो उनके पिता हैं कई बार न्यायालय में उपस्थित के लिए आए किंतु उनकी गवाही नहीं कराई गई। उन्होंने आदेश पत्रक पर यह टिप्पणी अंकित की कि अगली तिथि पर उन्हें साक्षी के बतौर गवाही के लिए लिए हाजिर करूंगा। जबकि थाना गिलौला की रिपोर्ट के अनुसार जोखन पुत्र श्रीराम की मृत्यु लगभग पांच वर्ष पूर्व ही हो चुकी है। न्यायालय ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए थानाध्यक्ष गिलौला को दो दिन के भीतर अपनी स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इसके साथ में यह भी कहा है कि क्यों ना आपको न्यायालय पर मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए दंडित किया जाए। न्यायालय ने अपने आदेश की एक प्रति पुलिस अधीक्षक, जिला अधिकारी सहित पुलिस महानिदेशक को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है।
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