श्रावस्ती। कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को जिला पोषण समिति की बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता करते हुए डीएम ने नियमित रूप से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने तथा मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही। अधिकारियों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर वहां मिलने वाली सुविधाओं की नियमित मानीटरिंग करते रहने का निर्देश दिया।
बैठक में जिलाधिकारी नेहा प्रकाश ने कहा कि बच्चों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। उनके स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए उन्हें पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराया जाए। जहां रजिस्टर में बच्चों की भर्ती की तिथि, अभिभावक का मोबाइल नंबर सहित पूरा पता, भर्ती के दौरान दी गई दवाओं का विवरण एवं बच्चे की हिस्ट्री तथा डिस्चार्ज की तिथि अंकित करें। बाद में उसका फॉलोअप भी किया जाए। आंगनबाड़ी केन्द्रों की जांच के बाद नोडल अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट में जिन कमियों का उल्लेख किया जाता है, संबधित सीडीपीओ उन कमियों को दुरूस्त करायें। आंगनबाड़ी केन्द्रों के खुलने और बंद होने की रिपोर्ट भेजने के साथ ही उसकी नियमित मानीटरिंग भी की जाए।
उन्होंने कहा कि गांव में तैनात कर्मचारी कुपोषित बच्चों के घर जाकर उनके परिजनों को पोषण व सफाई के लिए प्रेरित करें। सभी सीडीपीओ बुधवार और शनिवार को आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आयोजित होने वाले ग्रामीण पोषण स्वास्थ्य दिवस की मानीटरिंग करें। बैठक में सीडीओ अनुभव सिंह, डीपीओ आशा सिंह, एसडीएम भिनगा प्रवेन्द्र कुमार, जमुनहा सौरभ शुक्ला, रोहित, डीडीओ राम समुझ, एसीएमओ डा. सन्त कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अभी तक नहीं बन सके 17 आंगनबाड़ी केंद्र
जिले में बीते वित्तीय वर्ष में 17 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराया जाना था। इसके सापेक्ष अभी आठ आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य ही प्रारंभ कराया जा सका है, जबकि नौ आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की प्रक्रिया अभी प्रारंभ नहीं हो सकी है। ऐसे में इन केंद्रों को या तो नजदीकी विद्यालय के भवनों से संचालित किया जा रहा है या फिर कार्यकर्ताओं द्वारा इसे किराए के भवन से संचालित किया जा रहा है। निर्माण कार्य में तेजी आए तो यह सभी 17 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण पूरा हो सके। जबकि इनके लिए बजट पहले से ही मुहैया कराया जा चुका है।