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झूम कर बरसे मेघ, सराबोर हुए खेत

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श्रावस्ती। तराई की धरती बुधवार को बारिश से सराबोर हो गई। भोर शुरू हुई बरसात रुक-रुक कर जारी रही। कभी रिमझिम तो कभी झमाझम बरसात के कारण खेत-खलिहान व गांव की गलियां सराबोर हो गईं। अपेक्षित बरसात देख किसान भी हल-बैल लेकर खेतों में पहुंच गए। मौसम खुशगवार होने के कारण जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों ने धान की रोपाई भी शुरू कर दी है।
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जिले में विगत तीन माह से बरसात न होने के कारण सावन मास का पहला सप्ताह बीतने के बाद भी खेतों में धूल उड़ रही थी। धान की नर्सरी पानी के अभाव में सूख रही थी। किसानों का कलेजा मुंह को आ रहा था। जिन किसानों ने किसी तरह पंपिंग सेटों के सहारे धान की रोपाई शुरू की थी उनकी पौध भी धूप के कारण खराब हो रही थी जिसे सूखने से बचाने के लिए बार-बार किसानों को पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ रहा था। ऐसे में बुधवार भोर शुरू हुई बरसात ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी।
तेज बरसात के बाद जहां खेत व खलिहान पानी से सराबोर हो गए वहीं गांव की गलियां भी पानी से लबालब हो गईं। खेतों में भरे पानी को देख किसानों ने कहीं पानी निकल न जाए इसके लिए मेड़ बांध दी। वहीं, खेतों में पर्याप्त पानी देख ज्यादातर किसान धान की रोपाई करने के लिए ट्रैक्टर व हल-बैल लेकर खेतों में जुट गए। मौसम भी खुशगवार रहा। ऐसे में किसानों ने खेतों में बिना समय गवाएं धान की रोपाई शुरू कर दी। वहीं, असिंचित सिरसिया क्षेत्र में जिन किसानों ने अब तक धान की नर्सरी नहीं लगाई थी, वहां भी तैयारी शुरू हो गई।
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तराई में विगत तीन माह से बरसात न होने के कारण किसान उम्मीद खो चुके थे। ऐसे में अनुसूचित जन जाति बाहुल भचकाही, रनियापुर व मोतीपुर कला सहित इकौना के भगवानुपर व भलुहिया दसौंधी आदि गांवों में ग्रामीण इंद्र देव को मनाने के लिए बच्चों को काल-कलौटी खिला रहे थे। उनका मानना था कि सावन कृष्ण पक्ष सप्तमी (शुक्ला सप्तमी) की पूर्व संध्या पर काल-कलौटी खेलने से निश्चित ही बरसात होती है।
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