श्रावस्ती। तराई में पारा बृहस्पतिवार को 42.5 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा। लेकिन सुबह से ही सूरज की किरणें व गर्म पछुआ हवा ने लोगों को बेहाल कर दिया है। वहीं खराब हैंडपंप व सूखे जलाशयों से कई क्षेत्रों में पेयजल संकट हो गया है। इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। गर्म हवा का असर जायद की फसल पर भी दिखाई देने लगा है।
तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस पर पिछले तीन दिन से स्थिर है। पांच किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रही गर्म पश्चिमोत्तर हवा से लोग झुलस रहे हैं। जिससे लोग सुबह से ही पसीने से तरबतर दिख रहे हैं। हवा इतनी गर्म हैं कि पंखा व कूलर बेअसर हैं। वहीं अघोषित बिजली कटौती से भी लोग परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग उमस भरी गर्मी से बचने के लिए बाग बगीचों का सहारा लेने को विवश रहे।
वहीं नगरीय क्षेत्रों में लोग विद्युत उपकरण पर ही निर्भर देखे गए। मौसम के मिजाज में नरमी का संकेत न मिलने से लोगों को जेठ की तपन की चिंता अभी से सताने लगी है।
पेयजल संकट, फिर भी नहीं चेत रहा प्रशासन
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर तालाब सूखे हैं। यही स्थिति जंगल में बने तालाबों व अन्य ताल तलैयों सहित पहाड़ी नालों की भी है। इनमें पानी न होने से पशु-पक्षी बेहाल हैं। सबसे खराब स्थिति नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैंडपंपों की है। जिले में 45 फीसदी सरकारी हैंडपंप या तो खराब हैं या उनसे दूषित पानी निकल रहा है। मरम्मत न होने से लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है।
तेजी से सूख रही नमी
किसानों ने खेतों में जायद सहित सब्जियों की बोआई की है। चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी से खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में किसान खेत में लगी मेंथा, गन्ना, मक्का, उड़द, लोबिया, तरोई, प्याज, भिंडी व खीरा आदि लतादार सब्जियों व फलों को सूखने से बचाने के लिए बार-बार सिंचाई को मजबूर हैं। जिससे उनकी लागत बढ़ रही है।