इकौना में बागी का निष्कासन तो भिनगा में कमजोर प्रत्याशी बना हार का कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। नगर सरकार गठन में भाजपा का पत्ता जिले में पूरी तरह से साफ हो गया। दोनों निकायों में गैर भाजपाइयों का कब्जा हो गया। इसका कारण इकौना में बागी पूर्व अध्यक्ष का चुनाव के दौरान पार्टी से निष्कासन तो भिनगा में कमजोर प्रत्याशी को मैदान में उतारना बताया गया।
जिले में केवल दो ही नगर निकाय हैं। भिनगा नगर पालिका परिषद है तो इकौना नगर पंचायत। विगत चुनाव में इन दोनों सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा है। इन दोनों निकायों में भले ही इससे पूर्व किसी अन्य दल का कब्जा रहा हो लेकिन मूल रूप से यह भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। भाजपा जैसे-जैसे सत्ता में मजबूत होती गई, वैसे-वैसे यहां के संगठन में आंतरिक कलह व नेतृत्व क्षमता में कमी देखने को मिली। आंतरिक कलह ऐसा कि खुले मंच पर ही भाजपा के पदाधिकारी कई मौकों पर तनावपूर्ण स्थिति में आ गए। इसका नतीजा निकाय चुनाव में साफ देखने को मिला।
इकौना में भाजपा ने पहले पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता उर्फ गुड्डू की पत्नी रेनू गुप्ता को प्रत्याशी बनाया था। इसी के बाद भाजपा खेमे के ही लोगों ने उनके पत्नी के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करा दिया। इसके बाद भाजपा ने दूसरी सूची में शांती कंठ्रा को अपना प्रत्याशी बनाया। इसी बीच जितेंद्र गुप्ता को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। चुनाव के दौरान निष्कासित होते ही वह कांग्रेस प्रत्याशी गजाला के साथ हो गए। ऐसे में जहां कभी भी इकौना नगर पंचायत में कांग्रेस का सभासद भी न बन पाया। वहां गजाला चेयरमैन पद के लिए विजेता बनीं।
भिनगा नगर पालिका की स्थिति इससे हट कर थी। यहां भी पूर्व अध्यक्ष अजय आर्य टिकट न मिलने के कारण बागी हो गए। तो भाजपा ने सबसे कमजोर प्रत्याशी के रूप में राकेश गुप्ता को मैदान में उतारा। टिकट मिलने के साथ ही उनके बारे में नगर में यह चर्चा थी कि वह दूसरे व तीसरे नंबर पर रहेंगे। यही चुनावी वातावरण उनके हार का कारण बना। यही नहीं जिले के दोनों निकायों से भाजपा का सफाया का कारण जिले के पार्टी नेतृत्व की क्षमता पर भी प्रश्नचिन्ह उठाता है।