बहादुरपुर में बाढ़ के हालात, घरों में घुसा पानी
इकौना व गिलौला में भी मंडराया बाढ़ का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। राप्ती नदी कुछ ही घंटों के लिए खतरे के निशान को पार कर गई। उतनी ही देर में नवनिर्मित मुजेहना तटबंध लगभग तीस मीटर कट कर बह गया। भिनगा के बहादुरपुर में बाढ़ के हालात बन गए। इसमें सात घर बाढ़ की चपेट में आ गए। कई स्थानों पर कृषि योग्य भूमि कट कर नदी में समाने की सूचना है।
जिले में हुई बरसात व नेपाल के पहाड़ी इलाकों से राप्ती में पानी आ जाने के कारण शनिवार रात करीब नौ बजे से नदी में बाढ़ की स्थिति बन गई। देखते ही देखते शनिवार देर रात करीब दो बजे राप्ती का जल स्तर खतरे के निशान (लाल निशान) से दस मिली मीटर ऊपर हो गया। खतरे के निशान से राप्ती जैसे ही ऊपर हुई। उसी समय तेज बहाव के कारण मुजेहना गांव को बचाने के लिए बनाया गया तटबंध लगभग तीस मीटर नदी में बह गया। जैसे-जैसे राप्ती आगे बढ़ती गई। वैसे वैसे गिलौला व इकौना में बाढ़ का तांडव शुरू हो गया।
गिलौला के पुरुषोत्तमपुर के पास नदी खेतों को काट रही है। यही स्थिति इकौना के कई स्थानों पर है। वहीं बाढ़ का असर पहाड़ी नालों में देखने को मिला। नेपाल की ओर से आए पानी के कारण भिनगा के बहादुरपुर गांव में रात में ही बाढ़ के हालात पैदा हो गए। सात घर पानी से घिर गए। यहां रहने वालों को बचाने के लिए प्रशासन रात में सक्रिय हो गया। सुबह जिले के अधिकारी पहुंच गए। वहीं रविवार सुबह आठ बजे के बाद राप्ती का जलस्तर सामान्य होने लगा। लेकिन तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर कटान हो रही है।
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ऐसे बढ़ा नदी का पानी
रविवार रात नौ बजे राप्ती खतरे के निशान 127.70 मीटर पर पहुंच गई। रात 10:00 बजे नदी खतरे के निशान से 10 मिली मीटर यानी कि 127.80 मीटर पर पहुंच गई। देर रात करीब 2:00 बजे राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बहते हुए 127.850 मीटर पर पहुंच गई। रविवार सुबह 7:00 बजे राप्ती 127.700 मीटर पर थी। लेकिन सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर घट कर 127.600 मीटर पर आकर सामान्य हो गया। लेकिन पानी का बहाव 45033 क्यूसेक प्रति घंटा ही रहा।
नदी का थोड़ा दबाव भी न बर्दाश्त कर सका तटबंध
वैसे तो राप्ती नदी में नेपाल से आने वाले पानी के कारण ही बाढ़ की स्थिति बनती है। लेकिन कभी-कभी जिले में हुई बरसात के कारण भी स्थिति असामान्य हो जाती है। शनिवार को हुई बरसात के साथ नेपाल के पहाड़ों पर हुई बरसात का पानी राप्ती में आया तो बाढ़ की स्थिति बन गई। इसी बाढ़ से मुजेहना सहित आसपास के करीब 35 गांवों को बचाने के लिए मुजेहना तटबंध का निर्माण किया गया था। तटबंध निर्माण के लिए जो मिट्टी प्रयोग की गई वह बलुई थी। इसके साथ ही कार्यदायी संस्था ने मिट्टी डालने के साथ ही इसे कनेक्ट नहीं किया था। जिसके चलते मात्र दस एमएम खतरे के निशान से ऊपर जाते ही तटबंध बह गया। जबकि नदी का इतिहास 30 से 40 एमएम के खतरे के निशान से ऊपर का है। हालात यदि ऐसे हुए तो तटबंध का कोई भी हिस्सा गांव को नहीं बचा पाएगा।
कटान स्थल पहुंच डीएम ने लिया जायजा
मुजेहना में हुए तटबंध के कटान की सूचना के बाद डीएम कृतिका शर्मा रविवार मौके पर पहुंचीं। जहां उन्होंने तत्काल कटान रोधी कार्य को पूरा करने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्होंने भिनगा व इकौना क्षेत्र में राप्ती नदी के तट पर कराये जा रहे कटान निरोधी कार्य का निरीक्षण कर जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खजुहा झुनझुनिया, अंधरपुरवा तटबंध का निर्माण भी देखा। बाद में मोहम्मदपुर कला पहुंच कर कार्य का जायजा लिया। साथ ही एसडीएम भिनगा एवं अधिशासी अभियंता बाढ़ कार्य खंड से पूर्व वर्षो में आयी बाढ़ एवं प्रभावित होने वाले ग्रामों के बारे में जानकारी ली। साथ ही सभी तहसीलों के एसडीएम को फोन से नदी के घटते बढ़ते जलस्तर पर नजर रखने, बाढ़ चौकियों व नावों को तैयार रखने का निर्देश दिया।