श्रावस्ती। जिले में बाल विकास परियोजना के कई पद रिक्त हैं। जिसके कारण बाल विकास की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। इन रिक्त पदों को भरने के बजाय नए पदों का सृजन कर नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
गर्भवती व धात्री महिलाओं सहित शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण की जिम्मेदारी निभाने वाली बाल विकास परियोजना जिले में अधूरी है। यहां सीडीपीओ, सुपरवाइजर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के कई पद रिक्त हैं जिन्हें अभी तक भरा नहीं जा सका है। वहीं इसके विपरीत परियोजना की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के 195 नए पद सृजित कर भर्ती करने की कवायद शुरु कर दी गई है।
जिले में देखा जाए तो सीडीपीओ के छह पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष मात्र पांच सीडीपीओ की ही तैनाती है। ऐसे में नगर परियोजना के सीडीपीओ को हरिहरपुर रानी विकास क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं जिले में सुपरवाइजर के 37 पद के सापेक्ष मात्र 12 पर ही तैनाती है। ऐसे में एक एक सुपरवाइजर को तीन-तीन क्षेत्र की जिम्मेदारी है।
इससे वह कार्यकर्ताओं के कार्यों का सुपरविजन नहीं कर पा रही है। यही हाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भी है। जिले में मौजूदा समय 925 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। जिसके सापेक्ष 768 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही तैनात हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के 157 पद रिक्त हैं। जिन्हें अभी भरा नहीं गया। वहीं अब 195 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के नए पद सृजित कर उस पर भर्ती की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
यह है केंद्रों की स्थिति
जिले में 925 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिनके सापेक्ष 674 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए हैं। वहीं 17 केंद्र निर्माणाधीन हैं। जबकि 173 आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालय में संचालित हो रहे हैं। जबकि 51 केंद्र किराए के भवन में व शेष सामुदायिक, पंचायत भवन व अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं।
कई बार किया पत्राचार
वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के नए सृजित पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। पूर्व से रिक्त पदों को भरने के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। - पीके दास, जिला कार्यक्रम अधिकारी