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Shravasti News: मजार बना कर रहे सरकारी जमीनों पर कब्जा

Tue, 06 Jun 2023 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
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श्रावस्ती। सीमावर्ती क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर मजार बनाने की आड़ में कब्जा किया जा रहा है। इसमें सड़क व नहर की पटरी के साथ वन व पुरातत्व विभाग की भूमि भी शामिल है। इस अवैध कब्जे के बाद इसका विस्तार होते विभाग देख रहा है। इसके बावजूद सब चुप हैं। भारत-नेपाल का सीमावर्ती इलाका जमुनहा इस समय अवैध मजारों को लेकर चर्चा में है।
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यह मजारें सरकारी भूमि पर योजनाबद्ध तरीके से बनाई जा रही हैं। पहले जंगल में किसी पेड़ के नीेचे साफ-सफाई करके एक चादर डाल देेते हैं। इसका विभाग की ओर से विरोध न होने पर चादर के नीचे मिट्टी लगा दी जाती है। इसके बाद इसी मिट्टी पर ईंट रख कर उसे मजार की शक्ल दे दी जाती है। धीरे-धीरे आसपास दूसरी मजार बनाकर इन मजारों में मिलाते हुए उसी दायरे में कहीं झोपड़ी तो कहीं बाकायदा मकान खड़ा कर दिया जाता है। इस तरह नजारा पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।
जंगल में ही पक्की बन गई मजार भिनगा से मात्र कुछ दूरी पर लौकी पुरवा गांव के निकट जंगल में पहले तो कुछ नहीं था। लेकिन इधर एक दो वर्ष में मजार अस्तित्व में आ गई। धीरे-धीरे मजार को तैयार किया गया। इसके बाद उसे पक्का स्वरूप दे दिया गया। इसे देखने से ही लगता है यह इधर एक दो वर्ष में बनकर तैयार हुई है। अब प्रश्न यह है कि इतनी बड़ी मजार बन कैसे रही है।
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भिनगा से राप्ती बैराज जाने वाले सड़क पर नथुनिया मोड़ के पास लोक निर्माण की पटरी पर पहले तो झंडी लगी थी। अब बांस व कई झंडे लग गए। यहां भी धीरे-धीरे धार्मिक गतिविधियों का विस्तार होता जा रहा है।
यूं किया मजार का विस्तार
स्थानीय लोगों की माने तो घने जंगल में सरकार अशरफ की मजार है। जहां लोग नहीं पहुंच पाते। इसलिए मनवरिया भोजा में सरयू नहर की पटरी पर ही उनकी एक दूसरी मजार बना दी गई है। यह मजार प्रतीकात्मक है, दावा है कि जंगल की मजार से सरकार अशरफ यहां अदालत के लिए आते है। यह जमीन भी नगर विभाग की बताई जाती है।
पुरातत्व विभाग की भूमि पर भी मजार
श्रावस्ती स्थित अंगुलिमाल गुफा के किनारे एक मजार पुरातत्व विभाग की भूमि पर बनी है। स्थानीय लोगों की मानें तो यहां भी कुछ वर्ष पूर्व ऐसे ही चादर पड़ी थी। अब यह मजार दो बीघे से ज्यादा भुमि पर है। यहां पक्का निर्माण हो चुका है। यह सब होते हुए पुरातत्व विभाग वर्षो से देख रहा है। यहां तक कि उसके अभिलेख में इस मजार का जिक्र नहीं है। इसके बावजूद मजार परिसर दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है।
वन भूमि पर अवैध मजार हटाने की कार्रवाई वनविभाग की ओर से इससे पहले भी की गई है। यदि कहीं नई मजार है तो उसे भी हटाया जाएगा। इस तरह अवैध मजार बनाने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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डीएन सिंह, डीएफओ
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