श्रावस्ती। पूर्व मुख्यमंत्री व सपा के संस्थापक धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना ने जिलेवासियों को स्तब्ध कर दिया। इस सूचना से जिले में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को पूरे दिन हर घर व चौक-चौराहों पर सिर्फ नेताजी की ही चर्चा होती रही। इस दौरान जिले के पुराने सपा कार्यकर्ताओं व पदाधिकारी ने उनके साथ बिताए पलों को साझा किया। हर किसी का यह मानना था कि नेताजी हकीकत में धरतीपुत्र व जमीनी नेता थे। वह जिसको भी डांटते थे उसे बहुत मानते थे। यदि नेता जी ने किसी काम के लिए डांटा तो वह काम होना तय था।
जीवन में पहली बार मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर में बैठने का नहीं भूलेगा पल
जिले के पूर्व सपा अध्यक्ष, पूर्व एमएलसी व पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद रमजान लोकदल से समाजवादी पार्टी बनने के दौरान पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता थे। जिनका पार्टी प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के प्रति समर्पण रहा। यही कारण था कि उन्हें न सिर्फ पार्टी का जिलाध्यक्ष बनने का मौका मिला। बल्कि बहराइच-श्रावस्ती से एमएलसी व इकौना वर्तमान में श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ।
हाजी मोहम्मद रमजान ने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि वह नेताजी को अपना अभिभावक, मार्गदर्शक व प्रेरणास्रोत मानते हैं। जब हम जिलाध्यक्ष थे तब विधानसभा का चुनाव हो रहा था। उस समय भिनगा के जूनियर हाईस्कूल मैदान में चुनावी जनसभा को संबोधित करने आए तत्कालीन मुख्यमंत्री धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव उन्हें अपने हेलीकॉप्टर पर बैठाकर नानपारा, गिरंट व कैसरगंज जनसभा में ले गए थे। नेताजी हमें सदैव रमजानी कहा करते थे। मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर पर बैठने का जो सौभाग्य नेताजी ने दिया, वह कभी नहीं भूलेगा। एक बार इलाहाबाद में सम्मेलन था। जिसमें शामिल होने मैं भी गया था। इस दौरान मैं कार्यक्रम स्थल के बाहर सड़क किनारे खड़ा होकर चाय पी रहा था। तभी नेता जी का काफिला गुजरा। जिन्होंने मुझे देखते ही अपना काफिला रोक दिया। और मुझे डांटते हुए बाहर खड़े होने का कारण पूछा, तो मैंने बताया कि चाय पीने आया हूं। इस पर फटकार लगाते हुए नेताजी ने कहा था कि क्यों रमजानी अंदर चाय नहीं थी क्या। वह सभी चुनावों में पार्टी प्रचार के लिए जाने पर हमें अपनी जेब से पैसा देते थे। और कहते थे कि यह ईमानदार है यह किसी के पैसे की चाय नहीं पीता। नेताजी ने जब-जब हमें डांटा तब-तब हमारा काम जरूर किया। वह हमें इतना मानते थे कि राज्यपाल भवन में भी मुझे अपने साथ ले गए थे।
हमने पार्टी संरक्षक ही नहीं अपना गाडफादर भी खोया
समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष सरोजनी शर्मा नेताजी के निधन से काफी दुखी हैं। वह नेताजी को पार्टी का संरक्षक ही नहीं अपना गाडफादर भी मानती थीं। अभी विगत फरवरी में जब वह दिल्ली गई थीं तब उनकी नेताजी से मुलाकात हुई थी। वह बताती हैं कि नेताजी का आदेश था कि जब भी लखनऊ या दिल्ली आओ और मैं वहां होऊ तो हमसे मिले बिना वापस न जाना। नेताजी ने जितना सम्मान हमको दिया। वह कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। अरविंद सिंह गोप के चुनाव में नेताजी प्रचार के लिए मुझे अपने साथ ले गए थे। जहां पूरे दिन में नेता जी के साथ रैलियों में शामिल रही थी। वह पल मुझे आज भी याद है।
खरगौरा से लखनऊ तक नेताजी के साथ गया था पैदल
इकौना निवासी सुरेंद्र पाठक नेताजी के निधन को राष्ट्र व राजनीति के लिए अपूर्णनीय क्षति मानते हैं। वह बताते हैं कि नेताजी ने मुख्यमंत्री बनने से पूर्व क्रांतिरथ चलाया था। तब मैंने इकौना क्षेत्र के सत्य नारायण के साथ अच्छी भीड़ एकत्र की थी। जिसे देख नेताजी काफी खुश हुए थे। उन्होंने इसके लिए हमें व सत्यनारायण को सम्मानित भी किया था। तब आज की तरह मोबाइल व सेल्फी का युग नहीं था। इसलिए वह यादगार तस्वीर मेरे पास नहीं है। भिनगा क्षेत्र के पंडित कृष्ण बहादुर मिश्र जनसंघ से बहराइच विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे थे। तब उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बाद वह लोक दल से चुनाव लड़े थे। हालांकि वह चुनाव तो नहीं जीते लेकिन 1980 से पूर्व उनके संयोजन में सिरसिया से लखनऊ तक पदयात्रा निकाली गई थी। जिसमें नेताजी सिरसिया से लखनऊ तक पैदल गए थे। इसमें सिरसिया के पैकौरी निवासी विजयपाल सिंह का विशेष सहयोग था। पदयात्रा के दौरान कई बार नेताजी विजयपाल सिंह के कंधे पर हाथ रख कर चले थे। नेताजी जिसे एक बार देख लेते थे या जिससे मिल लेते थे। उसे तथा उसका नाम कभी नहीं भूलते थे।
शोक सभा आयोजित
श्रावस्ती। सपा के संस्थापक एवं संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन पर जिले में जगह-जगह शोकसभा का आयोजन हुआ। इस दौरान जिलाध्यक्ष सर्वजीत यादव के नेतृत्व में उनके आवास पर शोकसभा आयोजित हुई। प्रदेश सचिव लोहिया वाहिनी व पूर्व जिला अध्यक्ष यूथ ब्रिगेड राजेश यादव के नेतृत्व में उनके आवास पर शोक सभा का आयोजन हुआ। वहीं जमुनहा तहसील में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सत्यनारायण यादव के नेतृत्व में शोक सभा हुई। इतना ही नहीं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों की ओर से भी शोकसभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान लोगों ने धरतीपुत्र के निधन का भारतीय राजनीति के लिए अपूर्णनीय क्षति बताते हुए कहा कि आज देश ने एक जमीनी नेता खो दिया। जिसे कभी भी न तो भुलाया जा सकता है। और न ही उनके जैसा कोई दूसरा नेता ही पैदा होगा।