श्रावस्ती। तराई में युवाओं का हृदय कमजोर होता जा रहा है। अमर उजाला के हृदय रोग जांच शिविर में पहुंचे 116 मरीजों में 38 युवा मरीजों का आना गंभीर हैं। चौदह लाख की आबादी पर एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ न होना और चिंताजनक है। तराई के लोगों के हृदय की जांच के लिए अमर उजाला ने सीएचसी भिनगा में जांच शिविर का आयोजन किया था। चरक हाॅस्पिटल, लखनऊ व इंडियन रेडक्राॅस सोसाइटी, श्रावस्ती के सहयोग से लगाए गए इस शिविर में 116 मरीज पहुंचे थे। इसमें से 38 मरीजों की उम्र 35 वर्ष से कम थी। कुछ युवा मरीज ऐसे भी आए थे जो पहले ही स्टंट डलवा चुके हैं। पेसमेकर लगवाने की सलाह पाए कुछ मरीज भी शिविर में आए थे। संयुक्त जिला चिकित्सालय में जांच के लिए सिर्फ एक ईसीजी मशीन है। फिजीशियन या फिर सामान्य चिकित्सक जांच कराकर दवाएं लिख रहे हैं। ऐसे में लगातार जिले में हृदय रोगियों का बढ़ना आने वाले समय के लिए किसी खतरे से कम नहीं है।
तराई वाले इस जिले की जनसंख्या करीब चौदह लाख है। साथ ही बलरामपुर जिले का सिपुरा ब्लाॅक व नेपाल के बांके जिले का कुछ भाग श्रावस्ती जिले से सटा हुआ है। वहां के मरीज भी इलाज के लिए जिला चिकित्सालय, श्रावस्ती आते हैं। देखा जाए तो जिले परकरीब बीस लाख लोगों को स्वस्थ रखने का जिम्मा है। इसमें से प्रतिदिन पच्चीस से तीस हार्ट के मरीज गंभीर स्थिति में आते है। श्रावस्ती के पास इन लोगों के इलाज के लिए सात सीएचसी व आठ पीएचसी तो है, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। एमडी मेडिसिन चिकित्सक की तैनाती जिले में है। वहीं हृदय रोगियों का भी इलाज करते हैं। यदि कोई ह्रदय रोगी गंभीर हालत में होता है तो उसे मेडिकल काॅलेज भेजा जाता है। - एसपी तिवारी, सीएमओ
बॉक्स में- कोविड के बाद हृदय रोगियों की संख्या अचानक बढ़ी है। खानपान व बाह्य वातावरण का असर भी हृदय पर पड़ता है। मैंने कई जगह इस तरह के शिविरों में हिस्सा लिया, लेकिन भिनगा में एक साथ इतने मरीज आना आश्चर्य की बात है। - डॉ. गौरव पांडे, डीएम, कार्डियो, चरक हॉस्पिटल