जेतवन परिसर की परिक्रमा करते बौद्ध अनुयायी।
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को लद्दाख और देहरादून से आए 94 सदस्यीय अनुयायियों के दल से गुलजार रही। बौद्ध भिक्षु जलछन लामा के नेतृत्व में दल ने जेतवन परिसर और गंधकुटी में विशेष वर्षावास पूजा की। इसके बाद बौद्ध सभा आयोजित हुई। बौद्ध संस्कृत महासभा की ओर से श्रावस्ती से जेतवन तक जुलूस निकाला गया। इस दौरान अनुयायियों ने बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि और संघं शरणं गच्छामि के उद्घोष किए। भिक्षु जलछन लामा ने वर्षावास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भिक्षुओं के लिए ज्ञान, ध्यान और दान का पर्व है। इस अवधि में वे गुरुओं के सानिध्य में धर्म का अध्ययन, ध्यान और धम्म देशना करते हैं। पूजन के बाद दल ने बोधि वृक्ष, शिवली स्तूप, सूर्यकुंड, संघाराम बुद्ध विहार, राहुल कुटी और कच्ची-पक्की कुटी का भ्रमण कर इतिहास की जानकारी ली।