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गेट भारत में तो खिड़की नेपाल में: सीमा पर नो मेंस लैंड पर खड़े हुए मदरसे, बस रहीं नई बस्तियां; एजेंसियां बेखबर

Sat, 10 Sep 2022 10:35 PM IST
Vikas Kumar विभाकर शुक्ल, अमर उजाला, श्रावस्ती।

सार

वर्ष 2020 तक यहां झुग्गी झोपड़ी थी, आज पक्का मकान बन गया है। यहां मस्जिद व 22 मदरसे बन चुके हैं। एक मदरसे की मान्यता का भी दावा किया जा रहा है। 
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भारत नेपाल सीमा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मदरसों के सर्वे के बीच यह खबर न सिर्फ चौंकाने वाली है बल्कि चिंता भी बढ़ाती है। भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर बीते पांच सालों में मस्जिद, मदरसे व बस्तियों की बाढ़ सी आ गई है। सरहदी इलाकों को तो छोड़िए, नो मेंस लैंड पर भी मदरसे खड़े कर दिए गए हैं। मदरसों से लगी नई बस्तियां भी पनप रही हैं। एक तरह से पूरे नो मेंस लैंड पर कब्जा हो चुका है। स्थिति यह है कि मदरसे का गेट भारत में है तो पीछे की खिड़की नेपाल में खुलती है। चिंता की बात यह है कि इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय नहीं दिख रहीं।

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रोशनगढ़ गांव में ऐसा नजारा साफ नजर आता है। एक तरह से नो मेंस लैंड पर बस्ती का कॉरिडोर बन गया है। जैसे-जैसे बस्तियां बंटती जा रही हैं, दोनों देशों को अलग करने वाले शिलापट भी गायब होते जा रहे हैं। सिर्फ दो साल में ही चार फुट ऊंचा शिलापट महज नौ इंच बचा है। पूरे इलाके को पाटकर सघन आबादी बस गई है। वर्ष 2020 तक यहां झुग्गी झोपड़ी थी, आज पक्का मकान बन गया है। यहां मस्जिद व 22 मदरसे बन चुके हैं। एक मदरसे की मान्यता का भी दावा किया जा रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय के इन लोगों के पास नेपाल की नागरिकता है तो भारत का आधार कार्ड भी। ये दोनों देशों में बेखौफ घूमते हैं।
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सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी की है। यदि सीमा क्षेत्र में नई बस्ती बस रही है या फिर कोई नया मदरसा खुल रहा है तो एसएसबी से इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। - कमलेश चंद्र, एडीएम
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