रोशनगढ़ गांव में ऐसा नजारा साफ नजर आता है। एक तरह से नो मेंस लैंड पर बस्ती का कॉरिडोर बन गया है। जैसे-जैसे बस्तियां बंटती जा रही हैं, दोनों देशों को अलग करने वाले शिलापट भी गायब होते जा रहे हैं। सिर्फ दो साल में ही चार फुट ऊंचा शिलापट महज नौ इंच बचा है। पूरे इलाके को पाटकर सघन आबादी बस गई है। वर्ष 2020 तक यहां झुग्गी झोपड़ी थी, आज पक्का मकान बन गया है। यहां मस्जिद व 22 मदरसे बन चुके हैं। एक मदरसे की मान्यता का भी दावा किया जा रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय के इन लोगों के पास नेपाल की नागरिकता है तो भारत का आधार कार्ड भी। ये दोनों देशों में बेखौफ घूमते हैं।
सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी की है। यदि सीमा क्षेत्र में नई बस्ती बस रही है या फिर कोई नया मदरसा खुल रहा है तो एसएसबी से इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। - कमलेश चंद्र, एडीएम