बभनपुरवा के मजरा जमुनही में सूखा पड़ा तालाब
श्रावस्ती। तराई में मौसम का मिजाज लगातार गर्म होता जा रहा है। जेठ की तपती दोपहरी व गर्म पछुआ हवा जहां राहगीरों की राह रोक रही है। वहीं हलक गीला करने के लिए हर किसी को पानी की तलाश है। वहीं प्रमुख मार्ग व चौक चौराहों सहित सार्वजनिक स्थलों पर खराब हैंडपंप लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे जलाशयों के कारण मवेशियों के सामने पेयजल संकट गहराने लगा है। मई के पहले पखवाड़े में ही जेठ की तपन ने लोगों को बेहाल कर दिया है। सुबह निकलने वाली चिलचिलाती धूप व गर्म पछुआ हवा लोगों को घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर रही है। सहालग का दौर होने के बाद भी दोपहर में मुख्य मार्ग व बाजार सूने-सूने दिखाई दे रहे हैं। जेठ की तपती दोपहरी राहगीरों की राह रोक रही है। रविवार को मौसम का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा। जिसके चलते लोगों के हलक भी सूखने लगे हैं। ऐसे में हलक गीला करने के लिए हर किसी को पानी की दरकार है।
इसके विपरीत भिनगा व इकौना नगर सहित जिले के अन्य प्रमुख कस्बों व बाजारों, मुख्य मार्गों, तिराहों व चौराहों सहित सार्वजनिक स्थलों पर लगे अधिकांश हैंडपंप खराब हैं। ऐसे में प्यास बुझाने के लिए लोगों को होटल व दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्र के तालाबों की है। अधिकांश तालाबों में पानी न होने के कारण पशु पक्षियों के सामने पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में मवेशी पानी की तलाश में आबादी की ओर पलायन कर रहे हैं। जिससे निपटने के लिए अब तक प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई है। इससे पशु पालकों सहित पशु प्रेमियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।
संचारी रोग अभियान के तहत होनी थी नलों की मरम्मत
जिले में अप्रैल माह में संचारी रोग नियंत्रण माह व दस्तक अभियान के रूप में मनाया गया। यह सब कागजों तक ही सीमित रहा। अभियान के दौरान न सिर्फ वृहद सफाई अभियान चलाया जाना था। बल्कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत के साथ ही लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाना था। जिसका जिले में कहीं कोई असर देखने को नहीं मिला। प्रशासन की ओर से चलाया गया यह अभियान सिर्फ हवा हवाई रहा। जिसका असर अब देखने को मिल रहा है। चाहे इंसान हो अथवा पशु-पक्षी सभी के सामने पेयजल की समस्या उत्पन्न है। संवाद