कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में सोमवार को बौद्ध अनुयायियों का जमावड़ा जुटा। इस दौरान इंडोनेशिया से आए चालीस सदस्यीय दल ने विशेष पूजन कर विश्व शांति की कामना किया। इसके बाद उन्होंने तपोस्थली से जुड़े कौशांबी कुटी, कच्ची कुटी ,पक्की कुटी, शिवली स्तूप, सभा मंडप, सूर्यकुंड ,आनंद कुटी आदि का भ्रमण कर उनकी ऐतिहासिकता से जुड़े तथ्यों को भी समझा व परखा।
इससे पूर्व वर्षावास पूजा में बौद्ध उपदेश के दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि अप्प दीपोभाव अर्थात अपना दीपक स्वयं बनो क्योंकि आकाशे च पदं नत्थि, समणों नत्थि बाहरे। अर्थात आकाश में पथ नहीं होता। जो बाहर की तरफ दौड़ता है वह ज्ञान को उपलब्ध नहीं हो सकता। इसलिए आप बुद्ध के मार्ग में ध्यान लगाओं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध आनंद की बात नहीं करते। वह कहते हैं कि दुख पैदा करने के आयोजन छोड़ दो। आनंद तो अपने आप हो जाएगा। आनंद तो मनुष्य का स्वभाव ही है।
कहा कि व्यक्ति सोचता है कि जब आनंद मौजूद ही है तो उसे पाने की ही कोशिश करें। परंतु आनंद दुख को मिटाए बिना नहीं मिलता। आनंद की खोज में वह दुख को भूल जाता है। दुख के रास्ते पर चलता है और आनंद की कामना करने लगता है। बताया कि बुद्ध का कहना है कि स्वास्थ्य पाना है तो बीमारियों का कारण ढूंढों और उन्हें हटाओ, तभी स्वास्थ्य रहोगे।