जेतवन परिसर में सभा के दौरान मौजूद अनुयायी।
- फोटो : जेतवन परिसर में सभा के दौरान मौजूद अनुयायी।
कटरा। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में रविवार को महाराष्ट्र के बौद्ध अनुयायियों का दल पहुंचा। बौद्ध भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में अनुयायियों ने जेतवन परिसर में पूजा अर्चना की। इसके बाद भिक्षु ने बताया कि बुद्ध ने भिक्षुओं को महापुरुषों के 32 लक्षणों के बारे में बताया था। महापुरुषों की दो ही गतियां होती हैं। एक तो वह यदि गृहस्थ है तो धार्मिक, धर्म राजा, चारों ओर विजय पाने वाला, शांतिस्थापक, सात रत्नों से युक्त चक्रवर्ती राजा होता है। उसके सात रत्न होते हैं जिनमें चक्ररत्न, हस्तिरत्न, अश्वरत्न, मणिरत्न, स्त्रीरत्न, गृहपतिरत्न और परिणायक रत्न। यदि वह गृह त्याग करता है तो संसार का आवरण हटाने में समर्थ होता है। इस दौरान अनुयायियों ने शिवली स्तूप, कौशाम कुटी, राहुल कुटी, संघमित्रा कुटी, सभा मंडप, सूर्य कुंड, कच्ची कुटी-पक्की कुटी भ्रमण कर इतिहास की जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।