कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड से आए अनुयायियों ने बंध कुटि व आनद बाधि पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर के नेतृत्व में अपने व विश्व कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान दल के सदस्यों ने तपोस्थली का भ्रमण कर जानकारी भी ली। इस दौरान बौद्ध भिक्षु आनंद सागर ने कहाकि दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करने वाला बोधिसत्व कहलाता है। बोधिसत्व जब दस बलों या भूमियों (मुदिता, विमला, दीप्ति, अर्चिष्मती, सुदुर्जया, अभिमुखी, दूरंगमा, अचल, साधुमती, धम्म मेघा) को प्राप्त कर लेते हैं तब बुद्ध कहलाते हैं। बुद्ध बनना ही बोधिसत्व के जीवन की पराकाष्ठा है। इस पहचान को बोधि (ज्ञान) नाम दिया गया है। कहा जाता है कि बुद्ध शाक्यमुनि केवल एक बुद्ध हैं। उनके पहले बहुत सारे थे और भविष्य में और होंगे। उनका कहना था कि कोई भी बुद्ध बन सकता है अगर वह दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करते हुए बोधिसत्व प्राप्त करे। बोधिसत्व के बाद दस बलों या भूमियों को प्राप्त करे। बौद्ध धर्म का अंतिम लक्ष्य है संपूर्ण मानव समाज से दुख का अंत। पूजन के बाद उपासकों ने शिवली स्तूप, अंगुलिमाल गुफा, पूर्वा राम विहार, कौशांबी कुटि, सभामंडप आदि का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी ली।