बोधि वृक्ष की पूजा करते बौद्ध अनुयायी।
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को थाईलैंड व श्रीलंका के अनुयायियों से गुलजार रही। वर्षावास पूजा के लिए आए सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में विशेष पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा भी हुई। इसमें भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने बौद्ध धर्म में वर्षावास का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि वर्षावास काल व्यतीत करने वाले भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर ध्यान-साधना और पूजन-अर्चन करते हैं। भिक्षु को बुद्ध के करुणा, शील और त्याग के सिद्धांतों का पूर्णरूपेण पालन करना होता है। अपना सारा समय लोगों की भलाई और तपस्या में लगाना होता है।