कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को म्यांमार से आए अनुयायियों के 30 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में कौशाम कुटी में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा में भिक्षु ने कहा कि सिद्धार्थ गौतम ने राजकुमार के रूप में विलासितापूर्ण जीवन जीने के बाद 29 वर्ष की आयु में राज-पाठ त्याग दिया। सत्य की खोज में निकले सिद्धार्थ को 35 वर्ष की आयु में बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञानोदय प्राप्त हुआ। इसके बाद वह बुद्ध कहलाए। बुद्ध ने अपना शेष जीवन ज्ञान की शिक्षा देने और दुख से मुक्ति का मार्ग बताने में व्यतीत किया।