कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती गुरुवार को म्यांमार से आए 40 सदस्यीय अनुयायी दल से गुलजार रही। बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में दल ने पारंपरिक तरीके से कौशाम कुटी का दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर बौद्ध सभा का आयोजन हुआ। भिक्षु देवानंद ने गौतम बुद्ध के जीवन संघर्षों की जानकारी देते हुए बताया कि सिद्धार्थ गौतम का जन्म 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुम्बिनी में हुआ था। राजकुमार के रूप में विलासितापूर्ण जीवन बिताने के बाद उन्होंने 29 वर्ष की आयु में राज-पाट त्याग दिया। 35 वर्ष की आयु में बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद वे बुद्ध कहलाए। उन्होंने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग से दुख मुक्ति का संदेश दिया। आनंद सागर, निर्मल सागर सहित अन्य मौजूद रहे।