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122 गांवों में कहर बरपा रहा बाढ़ का पानी

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श्रावस्ती। राप्ती नदी का जलस्तर जमुनहा के राप्ती बैराज पर धीरे-धीरे घट रहा है। रविवार को बैराज पर नदी का जलस्तर 128.80 मीटर मापा गया जो खतरे के निशान से 110 सेंटीमीटर अधिक है। राप्ती का जलस्तर भले ही घट रहा है, लेकिन कछार के गांवों में नदी का कहर जारी है। 44 गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं। यहां एक मंजिला मकान व छप्पर पूरी तरह से डूब हैं। लोग पलायन करने को मजबूर हैं। वहीं, 78 अन्य गांव भी पानी से घिरे हैं। इन गांवों में रहने वाली करीब तीन लाख की आबादी प्रभावित है। कछार क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के कारण जमुनहा के बाद अब इकौना क्षेत्र में भी बौद्ध परिपथ पर छोटे वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है।
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भूख से बिलबिला रहे बच्चे
तमाम घरों में चार दिन से चूल्हा नहीं जला है। प्रशासनिक मदद नाकाफी साबित हो रही है। चार दिन से भूखे लोगों को एक-एक लंच पैकेट से काम चलाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा बुरा हाल बच्चों का है। वे भूख से बिलबिला रहे हैं। उन्हें बिस्किट के पैकेट से संतोष करना पड़ रहा है। हैंडपंप पानी में डूब जाने के कारण लोग बाढ़ का पानी पीने को मजबूर हैं।
जिपं अध्यक्ष ने बांटा लाई-चना
बाढ़ से प्रभावित गांवों में लोगों की मदद के लिए जनप्रतिनिधि भी आगे आए हैं। पूर्व सांसद व जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्र ने अपने समर्थकों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों को लाई, चना व मोमबत्ती का वितरण किया। इससे लोगों को मामूली राहत तो मिली, लेकिन भोजन की पर्याप्त व्यवस्था न होने से लोग परेशान हैं।
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छतों पर जमाए हैं डेरा
बाढ़ से घिरे गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोग परिवार सहित पलायन कर चुके हैं। जो परिवार बचे हैं वे छतों पर डेरा जमाए हैं। उन्हें प्रशासनिक मदद का इंतजार है। बिजली व मोबाइल नेटवर्क बाधित होने के कारण ये परिवार मदद के लिए गुहार भी नहीं लगा पा रहे हैं।
खुद ही तोड़ रहे आशियाना
तटीय गांवों में राप्ती तेजी से कटान कर रही है। इसकी चपेट में आने से कई आशियाने बह चुके हैं। ग्रामीण अपने हाथ से ही आशियाना तोड़ रहे हैं ताकि ईंटें बचाई जा सकें।
मदद पहुंचा रही एनडीआरएफ की टीम
प्रशासन की तरफ से भोजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि, जो भी भोजन उपलब्ध हैं उसे एनडीआरएफ की टीम लोगों तक पहुंचा रही है। साथ ही फंसे लोगों को निकाला भी जा रहा है।
कई जगह रोका गया आवागमन
जमुनहा-बहराइच मार्ग पर पिपरहवा गांव के निकट बने पुल पर होल बन जाने के कारण आवागमन रोक दिया गया है। लक्ष्मननगर में हो रही कटान को देखते हुए बहराइच से आने वाले मार्ग पर आवागमन रोका गया है। यही हाल मल्हीपुर भंगहा, भिनगा तालबघौड़ा, भिनगा इकौना व भिनगा परसा मार्ग का भी है। बौद्ध परिपथ पर कटरा के निकट दो किलोमीटर तक मार्ग पर पानी तेजी से बह रहा है जिसे देखते हुए छोटे वाहनों का आवागमन रोका गया है।
एयरपोर्ट के रनवे पर भरा पानी
एयरपोर्ट के रनवे पर बाढ़ का पानी भर गया है। यहां कार्यालय के बाहर पार्किंग स्थल पर भी पानी भरा हुआ है। कटरा बाईपास चौराहे से एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग पर पानी के तेज बहाव को देखते हुए आवागमन रोक दिया गया है। बौद्ध परिपथ पर बहराइच-बलरामपुर मार्ग पर सिर्फ रोडवेज बसें, ट्रक व भारी वाहनों को ही जाने की अनुमति है।
पहाड़ी नाले भी बरपा रहे कहर
सिरसिया क्षेत्र में पड़ने वाले सूरजकुंडा, भैंसाही सहित सात अन्य पहाड़ी नाले पूरी तरह उफान पर हैं। इनका पानी आसपास के खेतों में फैल रहा है जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। इतना ही नहीं डगमरा नाला भी उफान पर है जिससे कई गांव का आवागमन बाधित होने के साथ ही कई गांवों का भिनगा व सिरसिया से संपर्क कटा हुआ है।
किसानों धड़कनें बढ़ीं
जिले में शनिवार को सामान्य रहा मौसम का मिजाज रविवार सुबह से बदला हुआ है। सुबह से ही आसमान पर छाई बदली व बीचबीच में हुई बूंदा बांदी से किसान सहम से गए हैं। किसानों को अपनी बची फसल के भी बर्बाद होने का डर सताने लगा है। राप्ती की कछार में बसे गांव के लोगों की धड़कने तेज हो गईं हैं।
212 गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित
करीब 212 गांवों की विद्युत आपूर्ति बाधित है। करीब पांच लाख की आबादी इससे प्रभावित है। वहीं, कई क्षेत्रों में मोबाइल टॉवर भी ठप हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपनों से संपर्क न कर पाने के कारण परेशान हैं।
सांसद के लापता होने का मेसेज वायरल
जिले के सांसद विगत माह हुई दिशा की बैठक में कलेक्ट्रेट आए थे। इसके बाद से वह जिले में नहीं लौटे। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे श्रावस्ती में वह कहीं भी दौर करते या हालचाल जानते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर के नीचे लिखा गया है, ‘गुमशुदा की तलाश’। सांसद, श्रावस्ती आपदा में हुए लापता। श्रावस्ती के सांसद को जनता इस आपदा में खोज रही है।
प्रशासन का दावा
बाढ़ प्रभावित इकौना तहसील क्षेत्र में 6255 लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। एनडीआरएफ व बाढ़ पीएसी की एक-एक टीम पांच मोटर बोट के साथ कार्य कर रही है। जमुनहा क्षेत्र में 1238 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। यहां भी एनडीआरएफ व बाढ़ पीएसी की एक-एक टीम दो नाव व चार मोटर बोट के साथ कार्य कर रही है। भिनगा तहसील क्षेत्र में 200 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। यहां बाढ़ पीएसी की दो टीमें तीन नाव व एक मोटर बोट के साथ कार्य कर रही हैं।
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- नेहा प्रकाश, डीएम
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