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Shravasti News: चौथे दिन भी धूप को तरसी तराई

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भिनगा स्थित रोडवेज बस अड्डे में पेड़ की पत्ती जला कर तापते लोग व भिनगा में ऊनी कपड़ों की खरीदारी क - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। चार दिन से तराईवासी धूप को तरस रहे हैं। गुरुवार को भी लोगों को कंपकंपाती ठंड से जूझना पड़ रहा है। पूरी रात बूंद बन कर बरसे कोहरे के कारण बढ़ी ठिठुरन ने लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर कर दिया है। प्रशासन की ओर से किए जाने वाले इंतजाम भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं।
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जिले में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार चौथे दिन भी सूरज कोहरे की चादर में लिपटा रहा। इस बीच लगातार 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही पश्चिमोत्तर बर्फीली हवाओं के कारण मौसम का पारा लुढ़क कर पांच डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। एक तरफ जहां घने कोहरे के कारण बसों के संचालन पर प्रभाव पड़ा है वहीं बहराइच से भिनगा व जमुनहा, भिनगा से सिरसिया, ताल बघौड़ा व लक्ष्मणपुर जाने वाली आखिरी बस भी समय से पूर्व ही रवाना हो रही है। जो निर्धारित समय से करीब आधे घंटे लेट से अपने गंतव्य तक पहुंच रही है।
बढ़े कोहरे व ठिठुरन के कारण जहां मुख्य मार्गों पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा है। वहीं वाहनों की संख्या भी कम दिखाई दे रही है। कंपकंपाती ठंड का असर भिनगा व इकौना नगर सहित जिले के अन्य बाजारों पर भी पड़ने लगा है। जहां सामान्य दिनों की अपेक्षा भीड़ काफी कम दिखाई दे रही है।
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बढ़ी मुश्किलें, सूख नहीं पा रहे गीले कपड़े
विगत पांच दिनों से धूप न निकलने के कारण लोगों के घरों में गीले कपड़े नहीं सूख पा रहे हैं। वहीं जिले के तराई व राप्ती के कछार क्षेत्र सहित गांवों में लोगों को पूरे दिन अलाव तापते देखा जा रहा है। इसका असर सरकारी कार्यालयों पर भी पड़ा है। जहां मौजूद कर्मचारी कार्य सरकार छोड़ खुद को ठंड से बचाने की जुगत करते दिख रहे हैं। इन सबके बावजूद महाविद्यालयों में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा होने के कारण परीक्षार्थियों को सुबह आठ बजे से ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंचना पड़ रहा है।
ठंड से घरों में दुबके लोग तो खेतों में डटे किसान
जिले में पड़ने वाली कंपकंपाती ठंड ने जहां लोगों को घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया है। वहीं किसान मौसम की परवाह न कर दिन रात गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहे हैं। इतना ही नहीं अपने फसलों को छुट्टा मवेशियों से बचाने के लिए किसान पूरी रात खेत की रखवाली करने को विवश है।
किसानों की इस समस्या को प्रशासन भी नजर अंदाज कर रहा है। जिले के सभी प्रमुख मार्गों पर हजारों की संख्या में मौजूद छुट्टा मवेशियों को न तो गोआश्रय स्थल ले जाया जा रहा है और न ही उसे संरक्षित ही कराया जा रहा है। संवाद
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