श्रावस्ती। जिले में निशक्त पुनर्वास के लिए संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र को गुरुवार को पुनर्जीवन मिला। यहां कार्यरत कर्मचारियों को वर्ष 2020 का बकाया वेतन डीएम ने चेक के माध्यम से दिया। कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम में सीडीओ सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। जिला नि:शक्त पुनर्वास केंद्र दिव्यांगों को मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के साथ कृत्रिम अंगों के निर्माण का कार्य करती है। यहां दिव्यांगों के साथ ही अन्य लोगों के लिए फिजियोथेरेपी की भी व्यवस्था है। परन्तु यह संस्था बजट के अभाव में दम तोड़ चुकी थी। यहां के कर्मचारियों को वर्ष 2020 से न तो मानदेय मिल पा रहा था और न ही रिक्त स्थानों पर नये कर्मचारियों की नियुक्ति ही हो रही थी। दिसंबर में यहां कार्यरत कर्मचारियों ने डीएम से मिल कर डीडीआरसी को पुनर्जीवित कराने की मांग की थी। डीएम के प्रयास पर वर्ष 2020 का बकाया मानदेय का बजट 11 लाख 44 हजार रुपए मिला है। इस पैसे का चेक डीएम ने डीडीआरसी में कार्यरत पांच कर्मचारियों को कलेक्ट्रेट में चेक के माध्यम से दिया है। इस मौके पर डीएम नेहा प्रकाश ने कहा कि आप लोग दोगुने उत्साह से दिव्यांगों के लिए कार्य करें। इस मौके पर बकाया वर्ष का मानदेय पाकर कर्मचारियों ने खुशी का इजहार करते हुए डीएम व सीडीओ का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी अनुभव सिंह ने कहा कि विषम परिस्थिति में भी डीडीआरसी के कर्मचारियों ने काम किया है। इससे जिले के निशक्तों को लाभ हुआ है। जबकि सीएमओ डॉ शारदा प्रसाद तिवारी ने डीडीआरसी संचालक इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी का उत्साह वर्धन किया। इस मौके पर संस्था के चेयरमैन अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि जिले में निशक्तों के लिए संयुक्त जिला चिकित्सालय में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र संचालित है। इसकी स्थापना जिले में वर्ष 2012 में ही हुई थी, लेकिन कई कारणों से यह संस्था अभी तक ठीक से कार्य नहीं कर पाती थी। अब धीरे धीरे व्यवस्था में सुधार हो रहा है। इस मौके पर एडीएम डीपी सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ संत कुमार, जिला निशक्तजन अधिकार चमन सिंह, के साथ डीडीआरसी के सभी कर्मचारी मौजूद रहे।