श्रावस्ती। जिले के कई महत्वपूर्ण विभाग प्रभारियों के सहारे संचालित हैं। इससे विभागीय योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही है। वहीं योजनाओं का सुपरविजन न होने से जिले का कायाकल्प प्रभावित है।
कृषि प्रधान जिले में जिला गन्ना अधिकारी व गन्ना कार्यालय न होने से किसानों को बहराइच व बलरामपुर जिले पर निर्भर हैं। बहराइच व बलरामपुर सीमा क्षेत्र के किसान गन्ने की खेती तो कर रहे हैं। लेकिन भिनगा सिरसिया, जमुनहा व गिलौला क्षेत्र के ज्यादातर किसान इससे वंचित हैं। यही हाल पर्यटन का भी है। बौद्ध तपोस्थली को भले ही पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर स्थान मिला हो। लेकिन यहां सहायक पर्यटन अधिकारी तैनात नहीं है। ऐसे में इकौना का सीताद्वार, गिलौला का सकरैल तालाब, भिनगा जंगल का भदिला ताल, सिरसिया का विभूति नाथ मंदिर व स्वर्ण प्रस्तरी आश्रम सहित सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पहचान नहीं बना पा रहा है। इतना ही नहीं अधिशासी अभियंता नलकूप व अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी की तैनाती न होने से इन विभागों की योजनाएं भी मूर्त रूप नहीं ले पा रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर अधिकारियों की तैनाती हो जाए तो जिले का कायाकल्प हो सकता है।