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Shravasti News: नेतृत्व क्षमता में कमी व भितरघात ने घटाया भाजपा का ग्राफ

Sun, 14 May 2023 06:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
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विगत बोर्ड के सापेक्ष दोनों निकायों में 50 फीसदी ही मिली सीट
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। निकाय चुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा है। दोनों निकायों में अध्यक्ष का पद भाजपा की पकड़ से दूर हो गया। वहीं सभासदों की संख्या में विगत बोर्ड के सापेक्ष 50 फीसदी का नुकसान हुआ है। दोनों निकायों मे भाजपा अल्पमत में है।
सत्तारूढ़ होने, कई लाभकारी योजनाएं नगर में चलाने के बावजूद भाजपा से नगरवासियों का मोह घटता चला जा रहा है। देखा जाए तो दोनों निकायों के आए नतीजे भाजपा के लिए मंथन का विषय हो सकता है। नगर पालिका भिनगा में जहां अध्यक्ष का पद पहले भाजपा के पास था। तो विगत बोर्ड में 25 के सापेक्ष छह सदस्य भाजपा के निर्वाचित होकर आए थे। ऐसे ही नगर पंचायत इकौना में अध्यक्ष भाजपा का था। इसके साथ ही 12 के सापेक्ष चार सदस्य भाजपा के निर्वाचित थे। लेकिन इस बार स्थिति बदल गई।
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भिनगा में भाजपा दूसरे स्थान पर तो रही लेकिन विजेता से भाजपा प्रत्याशी के मतों का अंतर काफी है। यही नहीं यदि सदस्यों के हार-जीत का आंकड़ा देखा जाए तो भाजपा के इस चुनाव में मात्र तीन सदस्य ही जीत कर आए। ऐसे में विगत बोर्ड के सापेक्ष भाजपा को 50 फीसदी सीटों का नुकसान हुआ है। यही स्थिति इकौना की है। वहां तो सारे रिकॉर्ड टूट गए। पहली बार अध्यक्ष का पद कांग्रेस के खाते में आया।
इकौना में भाजपा तीसरे स्थान पर रही। यही नहीं मतगणना प्रारंभ होने के शुरुआती दौर से ही भाजपा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। ऐसे ही यदि सभासदों के आंकड़ों को देखा जाए तो वहां 12 के सापेक्ष मात्र दो सभासद ही भाजपा के हैं। इसमें से एक निर्विरोध निर्वाचित है। ऐसे में जनादेश के आधार पर मात्र एक सीट ही भाजपा को मिली है।
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पहले से ही थी इस परिणाम की उम्मीद
चुनाव प्रारंभ होने के पहले ही इसी परिणाम की उम्मीद सभी को थी। इसका कारण था कि भाजपा से टिकट मांगने वालों में तीन नाम प्रमुख रूप से आगे थे। इसमें रामरूप गुप्ता, शैलेंद्र तिवारी उर्फ सोनू के साथ राकेश गुप्ता का नाम प्रमुख रूप से चल रहा था। इसमें सबसे कमजोर नाम रामरूप का बताया जा रहा था। इनके पास न तो कोई जनाधार था न तो बुद्धिजीवियों का समर्थन। यदि स्थानीय विश्लेषकों की मानें तो निवर्तमान निकाय अध्यक्ष जो पार्टी से बागी हो चुके थे। उनके समर्थन में भाजपा के ही कुछ पदाधिकारी पर्दे के पीछे से अपना समर्थन दे रहे थे। इसलिए भाजपा में डमी प्रत्याशी के रूप में राकेश गुप्ता को उतारा। ताकि इसका लाभ निर्दल बागी प्रत्याशी को मिले। लेकिन जनता का जनादेश कुछ और ही निकला। इसी तरह की चूक इकौना में पार्टी ने की। वहां चुनाव के दौरान निवर्तमान चेयरमैन जितेंद्र गुप्ता उर्फ गुड्डू को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके पीछे संगठन की अदूरदर्शी रणनीति व कुछ जन प्रतिनिधियों का प्रतिशोध बताया गया। पार्टी से निष्कासित होने के कारण उनके सजातीय वोट जो पारंपरिक रूप से भाजपा के मतदाता थे। उन्होंने साथ छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। ऐसे में देखा जाए तो पार्टी के पदाधिकारियों का भितरघात व अदूरदर्शी रणनीति ने भाजपा को निचले पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया।
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