श्रावस्ती। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम शांति व सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया। ताजिएदारों ने गमगीन माहौल में मातम के साथ ताजिये कर्बला ले जाकर दफन किए। वहीं, हिंदू धर्मावलंबी महिला व पुरुष भी मासिया गाते हुए जमकर लाठियां भांजते नजर आए। इन ताजियों को देर रात तक नजदीकी कर्बला में ले जाकर दफन किया गया।
हजरत इमाम हसन व हुसैन की याद में मनाया जाने वाला मुहर्रम मंगलवार को कर्बला पर ताजिये दफन करने के साथ संपन्न हुआ। इसके लिए मुख्यालय भिनगा स्थित अलक्षेंद्र इंटर कॉलेज मैदान में भिनगा व आसपास के ताजियेदार विभिन्न मार्गों से होते हुए पहुंचे। यहां से मातम व मासिया के साथ ताजिये नई बाजार होते हुए ईदगाह पहुंचे जहां देर रात्रि तक ताजियों को दफन किया गया। वहीं, सेमगढ़ा स्थित नहर व इकौना स्थित कर्बला, गिलौला क्षेत्र के मोहम्मदापुर, दर्जीपुरवा, साईपुरवा, मांजरे, गोड़ारी आदि स्थानों से आए ताजियेदारों ने भी ताजिये दफन किए। वहीं, सिरसिया क्षेत्र के गुलरा, जमुनहा के बदला व नासिरगंज सहित जिले के अन्य हिस्सों में जगह-जगह ताजियेदारों ने गमगीन माहौल में मातम के साथ अपने-अपने घरों से ताजिया ले जाकर नजदीकी ईदगाहों में दफन किया।
मुहर्रम के दिन जहां ताजियेदारों ने अपने-अपने घरों से ताजिये ले जाकर ईदगाह में दफन किए वहीं हिंदू समुदाय के लोग भी किसी से पीछे नहीं रहे। एक तरफ जहां मन्नतें पूरी होने पर जिले में हजारों की संख्या में हिंदू समुदाय के लोगों ने रोजा रखा वहीं परंपरागत ढंग से ताजिया भी रखा। वहीं, मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ सम्मिलित हो मातम व मासिया के साथ अपने ताजिये चौक से ईदगाह ले जाकर दफन किए। इसके साथ ही तमाम लोग जिनकी मन्नतें पूरी हुईं वे भी पायक बनकर मासिया गाते हुए ताजिये के साथ-साथ लाठियां भांजते देखे गए।
मुहर्रम पर जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। संबंधित थानाध्यक्षों सहित पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारी सुरक्षा के मद्देनजर ताजिया दफन होने तक ईदगाह पर ताजियेदारों के साथ लगे रहे। इस दौरान शांति व सौहार्द पूर्ण वातावरण में ताजिये दफन होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।