तेरह वर्ष पूर्व रमखड़वा गांव की घटना, एडीजे एफटीसी प्रथम ने दिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। भिनगा कोतवाली क्षेत्र के रमखड़वा गांव में तेरह वर्ष पूर्व विवाहिता के आत्महत्या के मामले में मंगलवार को एडीजे एफटीसी कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। मृतका के सास-ससुर को दोषी करार देते हुए न्यायालय ने दंपत्ति को आठ वर्ष की कैद व बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष की पैरवी कर रहे अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सत्येंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि भिनगा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नव्वा कोडरा निवासी लालबहादुर यादव पुत्र चुनमुन यादव ने 31 जनवरी 2010 को थाने में शिकायती पत्र सौंपा था। आरोप था कि उसने बहन का विवाह घटना के नौ वर्ष पूर्व कोतवाली क्षेत्र के ही रमखंडवा निवासी तुलसीराम यादव पुत्र गोकरण यादव से किया था। शादी के तीन साल बाद उसकी बहन विदा होकर अपनी ससुराल आई थी। तुलसीराम व उसका भाई शेषराम घटना के समय पंजाब में नौकरी कर रहे थे। जो कभी-कभी ही घर आते थे। घटना वाले दिन पीड़ित अपनी बहन को विदा कराने उसकी ससुराल गया था। जहां ससुर गोकरन यादव व सास सीतापति ने उसकी बहन को विदा करने से मना कर दिया। सास व ससुर आए दिन उसकी बहन को बच्चा न होने का उलाहना देकर प्रताड़ित करते थे। बहन की विदाई न होने पर पीड़ित बहन को समझा-बुझाकर घर चला आया था। जिसे शाम को पता चला कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया है। कोतवाली पुलिस ने मृतका के सास-ससुर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र भेजा थ। जिसके विचारण के बाद मंगलवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम करुणा सिंह ने आरोपी सास-ससुर को दोषी मानते हुए 8 वर्ष का कारावास व दोनों को दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। ऐसा न करने पर आरोपियों को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।