कटरा। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में शुक्रवार को बर्मा के बौद्ध अनुयायियों का दल पहुंचा। बौद्ध भिक्षु भौरानंद की अध्यक्षता में अनुयायियों ने गंधकुटी में फूल पूजा की और बोधि वृक्ष के दर्शन किए। इसके बाद आयोजित बौद्ध सभा में भौरानंद ने उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने दुख, उसके कारण और उससे मुक्ति का मार्ग बताया है। आध्यात्म दुख को समाप्त नहीं करता, बल्कि उससे मुक्ति का रास्ता दिखाता है। दुख अस्थायी है और एक दिन समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के बताए मध्यम मार्ग पर चलने से मानव कल्याण संभव है। इसके बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ का उद्घोष किया।