जेतवन परिसर में पूजा करते अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को वियतनाम से अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में जेतवन में पारंपरिक ढंग से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान हुई बौद्ध सभा में भिक्षु देवानंद ने बताया कि सिद्धार्थ का जन्म नेपाल के राज परिवार में हुआ था। उनका जीवन सुख-सुविधाओं से भरा था, लेकिन आध्यात्मिक जीवन के लिए उन्होंने सब कुछ त्याग दिया। छह वर्षों तक उन्होंने स्वयं को ध्यान में समर्पित किया। फिर भी, उन्हें शांति नहीं मिली और ज्ञान प्राप्ति के लिए वह जंगल की ओर निकल पड़े। सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।