तपोस्थली स्थित गंध कुटी पर प्रार्थना करते अनुयायी।
श्रावस्ती। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को अनुयायियों से गुलजार रही। म्यांमार से 48 सदस्यीय अनुयायियों का दल बृहस्पतिवार को तपोस्थली पहुंचा। दल के सदस्यों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में गंध कुटी में प्रार्थना की। इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि गौतम बुद्ध ने 21 वर्ष की आयु में दुखों से मुक्ति प्राप्त करने का उपाय ढूंढने के लिए अपने परिवार और गृहस्थ जीवन को छोडा़ था। निरंतर चिंतन मनन के बाद 35 वर्ष की आयु में इसका रास्ता भी खोज लिया था। 45 वर्ष तक लगातार उन्होंने अपने विचारों का प्रचार-प्रसार किया। जब उनका अंत समय आया, तब वह एक वृक्ष के नीचे लेट गए और मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे। उस समय उनका केवल एक ही शिष्य उनके पास था, उसका नाम आनंद था।