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तीन नवजात की मौत के मामले में क्लीन चिट, अफसर संतुष्ट

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श्रावस्ती। संयुक्त जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में दो घंटे के अंतराल में तीन नवजात की मौत हो गई। इस मौत के पीछे बिजली आपूर्ति न होने के कारण ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित होने का आरोप लगा था। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जांच में संयुक्त चिकित्सालय को क्लीन चिट दे दी है। इस जांच से स्वास्थ्य विभाग सहित प्रशासनिक अधिकारी संतुष्ट हैं। जबकि अस्पताल की व्यवस्था में कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू वार्ड में दो दिन पूर्व तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। इस मौत के बाद आरोप लगा कि अस्पताल में बिजली न होने के कारण ऑक्सीजन प्लांट बंद हो गया था। जिसके चलते यह घटना हुई। इसकी जांच सीएमओ ने ही की थी। जिसमें संयुक्त जिला चिकित्सालय के सीएमएस व अधिशाषी अभियंता विद्युत का बयान लेकर जांच पूरी कर दी गई। जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि शिशुओं की मौत का कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने से ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित होना नहीं था। इस जांच रिपोर्ट से स्वास्थ्य विभाग सहित जिले के प्रशासनिक अधिकारी संतुष्ट हो गए।
इसीलिए इस मामले में किसी अन्य प्रकार की जांच के लिए न तो कोई मजिस्ट्रेट नामित हुआ और न ही इस प्रकरण को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया कि जब संयुक्त जिला चिकित्सालय के पास डीजल मद में बजट ही नहीं है तो आखिर जेनरेटर चल कैसे रहा था। यह जेनरेटर उधार के डीजल से केवल घटना के दिन ही चला या फिॅर इससे पहले भी चलता था। या फिर इस मामले को रफा दफा करने के लिए ही जेनरेटर चलना बताया गया। फिलहाल जांच से अधिकारी संतुष्ट हैं। लेकिन अस्पताल की व्यवस्था में घटना के तीसरे दिन भी कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिला। गुरुवार दोपहर को अस्पताल में बिजली बाधित थी। लेकिन एसएनसीयू र्वार्ड में इनवर्टर से बिजली आपूर्ति हो रही थी। अन्य स्थानों पर जहां मरीज भर्ती थे वहां भयंकर उमस में भी पंखा चलाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसीलिए पूरे अस्पताल में एक तरह से बिजली के अभाव में अव्यवस्था का माहौल था।
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सीएमएस डॉ. जेता सिंह का कहना है कि डीजल मद में अभी उन्हें पैसा नहीं मिला है। लेकिन वह नजदीकी पेट्रोल पंप से डीजल जेनरेटर के लिए मंगवा रहे हैं। तीन से चार दिन के अंदर 50 लीटर डीजल खर्च हो जाता है।
कमरे में सीलन भरी हुई है। जिसके चलते आए दिन उपकरण खराब हो जाते हैं। इसी से बिजली बाधित होती है। सीएमएस डॉ. जेता सिंह का दावा है कि इस समस्या को दूर करने के लिए दो चार दिन में एक्जास्ट लग जाएगा। जबकि सीलन हटाने के लिए भी व्यवस्था बनाई जा रही है।
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