बोधि वृक्ष की पूजा करते बौद्ध अनुयायी
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को वियतनाम से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष की वर्षावास पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया। बौद्ध सभा में भिक्षु ने बताया कि लगभग 2,500 वर्ष पूर्व सिद्धार्थ का जन्म नेपाली राजा के घर हुआ था। सिद्धार्थ ने सुख-सुविधाओं का त्याग कर आध्यात्मिक जीवन अपनाया। छह वर्षों तक उन्होंने ध्यान किया, जिससे मन को दैनिक चिंताओं से मुक्त किया जा सके। 29 वर्ष की आयु में वे ज्ञान प्राप्ति के लिए वन में निकल पड़े। यह पूर्ण ज्ञान और असीम करुणा का संगम था। बाद में यह बौद्ध धर्म का केंद्रीय सिद्धांत बना।