फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महाभारतकालीन इस्सोपुरटील में बनेगी यमुना वाटिका

विज्ञापन
कांधला क्षेत्र के गांव इस्सोपुरटील में स्थित पुराना मंदिर। - फोटो : SHAMLI
विज्ञापन
महाभारत कालीन इस्सोपुरटील में बनेगी यमुना वाटिका
विज्ञापन

शामली। महाभारत कालीन इस्सोपुरटील को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जिला पंचायत की ओर से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस्सोपुरटील परिसर में यमुना वाटिका का निर्माण किया जाएगा।
कांधला क्षेत्र के इस्सोपुरटील में महाभारत कालीन अवशेष दबे हुए हैं। वर्ष 2002 में हुई कुछ खोदाई के दौरान इन टीलों में छपे हुए मृद भांड मिले थे। माना जा रहा है कि कांधला से करीब 12 किमी दूर बसे इस्सोपुरटील में यमुना के किनारे मिट्टी के ऊंचे टीले हैं। यहां करीब 3200 साल पहले लौह युगीन सभ्यता रही होगी। यमुना जल मार्ग से आवागमन होता था, तब यह स्थान काफी महत्वपूर्ण रहा होगा। वर्ष 2002 में चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रणधीर सिंह एवं शामली निवासी डॉ. उमर सैफ ने इस स्थान पर जांच की थी। मामूली सी खोदाई के दौरान यहां पर चित्रित धूसर मृदभांड मिले थे। डॉ. उमर सैफ बताते हैं कि यहां मिले मृदभांड पर ब्राह्मी लिपि में लिखा हुआ था।
विज्ञापन

जिला पंचायत के अपर मुख्य पंचायत अधिकारी नदीम अख्तर ने बताया कि इस्सोपुरटील में यमुना वाटिका और पार्क के रूप में विकसित करने के लिए डीएम जसजीत कौर के निर्देश पर जिला पंचायत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। भाजपा एमएलसी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह के प्रयास से एस्टीमेट शासन से स्वीकृत कराकर धनराशि अवमुक्त कराई जाएगी। कार्ययोजना के तहत इस्सोपुरटील में यमुना वाटिका, बैठने के लिए बेंच, शौचालय, बाथरूम आदि निर्माण कराए जाने हैं।
--
- महाभारत काल में रहा है महत्वपूर्ण स्थान
इस्सोपुरटील का महाभारत काल में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्र महाभारत सर्किट से जुड़े हैं। शामली हस्तिनापुर और कुरुक्षेत्र के बीच स्थित है। इसलिए माना जा रहा है कि कुरुक्षेत्र जाते समय कौरव और पांडव यहां से होकर गए होंगे।
- पर्यटन विभाग की ओर से विकसित किया जा रहा है इस्सोपुरटील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कैराना विधानसभा क्षेत्र के तहत मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना में शामिल किया गया है। पर्यटन विभाग की ओर से स्थान की पौराणिकता को देखते हुए इसे मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना में 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। पर्यटन विभाग की ओर से भगवान शिव, राधा-कृष्ण मंदिर का जीर्णोद्धार, चहारदीवारी निर्माण कार्य, 250 लंबाई की सीसी सड़क, श्मशान घाट, गोशाला और मुख्य द्वार से यमुना तट पर जाने के लिए सीसी सड़क का निर्माण किया जा रहा है।
विज्ञापन

इस्सोपुरटील में 45 मीटर लंबा यमुना घाट बनेगा
सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने बताया कि इस्सोपुर टील में 80 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से 45 मीटर लंबा यमुना घाट तैयार किया जाएगा। सिंचाई विभाग की ओर से भेजे गए यमुना घाट के एस्टीमेट से धनराशि शासन स्तर से स्वीकृत हो चुकी है। 1.20 करोड़ रुपये की लागत से बन रही गोशाला की चहारदीवारी का आठ लाख रुपये का एस्टीमेट भेजा जा रहा है। जिला पंचायत की ओर यमुना घाट तक सीसी रोड, टीले पर जाने के लिए सीसी रोड ब्लॉक की ओर से निर्माण किया जा रहा है।

कांधला क्षेत्र के इस्सोपुरटील में महाभारतकालीन टीला।- फोटो : SHAMLI

कांधला क्षेत्र के गांव इस्सोपुरटील के पास युमना नदी।- फोटो : SHAMLI

कांधला क्षेत्र के गांव इस्सोपुरटील में होता मंदिर का जीर्णोद्घार।- फोटो : SHAMLI

कांधला क्षेत्र के गांव इस्सोपुरटील में स्थित पुराना मंदिर।- फोटो : SHAMLI

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें