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मनरेगा से मजदूरों का मोहभंग, हर वर्ष घट रहे मजदूर

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मनरेगा से मजदूरों का हो रहा मोहभंग, हर वर्ष घट रहे मजदूर
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शामली। मनरेगा योजना की स्थिति जिले में खस्ताहाल नजर आ रही है। मजदूर इस योजना में कार्य करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। मजदूरों को योजना के तहत नाली, नाला सफाई व तालाब खुदाई का कार्य कराया जाता है। जिसे मजदूर करना नहीं चाहते है और दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि यहां मजदूरी भी काफी कम दी जा रही है। क्योंकि अन्य स्थानों पर मजदूरी करने पर उनको पांच सौ रुपये रोजाना दिए जाते हैं और सरकार भी मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। यहीं वजह है कि हर वर्ष यहां पर दो से तीन हजार मजदूर घट रहे हैं और वह अपना जॉब कार्ड भी निरस्त नहीं करा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना बनाई थी, जिससे मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार मिल सके। सरकार ने योजना तो चला दी थी, लेकिन मजदूरों की मजदूरी की तरफ ध्यान तक नहीं दिया है। जब योजना शुरू हुई तो मजदूरों ने सोचा कि उनको अच्छे-अच्छे कार्य दिए जाएंगे और इसी के चलते जॉब कार्ड तक बनवा लिए। जनपद में 18000 मजदूरों के जॉब कार्ड बने हुए हैं, लेकिन इनमें कार्य काफी कम को मिल रहा है। पिछले तीन साल की बात की जाए तो जनपद में हर वर्ष दो से तीन हजार मजदूर मनरेगा से दूरी बना रहे हैं। क्योंकि मजदूरों को नाली, नाला सफाई करना, तालाब की गंदगी में घुसकर उसकी सफाई करना अच्छा नहीं लग रहा है और वह यह कार्य करने से हाथ खड़े कर देते है, क्योंकि गंदगी में कोई भी घुसना पसंद नहीं करता है। इसकी वजह से वह मनरेगा में कार्य करना से मना कर देते है।
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वर्ष 2020-21 में 15093 मजदूरों को रोजगार दिया था, लेकिन वर्तमान में मात्र 10364 मजदूरों को ही कार्य मिला है। करीब तीन साल में ही पांच हजार के करीब मजदूरों ने मनरेगा से दूरी बनाई है। जिससे मनरेगा योजना काफी पिछड़ती जा रही है और अधिकारी व कर्मचारी भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे है। (संवाद)
इन कार्यों में आ रही दिक्कत
मनरेगा योजना में मिट्टी भराव, समतलीकरण कार्य, तालाब खुदाई व सफाई, नाला व नाली सफाई कार्य व अन्य कार्यों में दिक्कत आ रही है।
- मनरेगा योजना में मजदूरी कम होने के कारण मजदूर नहीं मिल रहे है और इसके कारण ही कार्य कराने में काफी दिक्कत सामने आती है। यदि मजदूरी साढ़े तीन सौ रुपये हो जाए तो मजदूर भी आराम से मिल जाएंगे और मनरेगा योजना में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। - कुसुम देवी बुटरेडी प्रधान
- मनरेगा में मजदूर मिल रहे हैं और जो कार्य होता है उसको भी समय से कराने का प्रयास किया जा रहा है। मजदूरी कम होने के कारण भी मनरेगा से मजदूर दूर हो रहे हैं। उनके गांव में जब भी जरूरत पड़ती तो वह मजदूरों को बुला लेते हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ गांव का विकास कराना है। - बिल्लू उर्फ अनुज बुटराड़ा प्रधान
यूपी से ज्यादा हरियाणा में मिलती है मजदूरी
मनरेगा योजना में यूपी से ज्यादा हरियाणा में मनरेगा मजदूरी दी जाती है। यहां 213 रुपये मिलती है तो हरियाणा में 300 रुपये से अधिक दी जाती है। यही कारण है कि मजदूर मनरेगा में कार्य नहीं करना चाहते और उनको अन्य कार्य करने पर रोजाना पांच सौ रुपये मजदूरी दी जाती है।
जॉब कार्ड बनवाकर फैक्टरी में कर रहे कार्य
जनपद के लोगों ने मनरेगा योजना में तो जॉब कार्ड बनवा लिया है, लेकिन मनरेगा में कार्य न करके फैक्टरियों व ईंट भट्ठों पर कार्य करते हैं, क्योंकि वहां अधिक मजदूरी मिलती है।
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इस तरह घटे मजदूर
वर्ष संख्या
2020-21 15093
2021-22 13734
2022-23 10364
जनपद में मजदूरों की संख्या कम हो रही है, क्योंकि काफी मजदूर नाला, नाली व तालाब सफाई व खोदाई कार्य करना नहीं चाहते है। अभी उनको जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। - चेतन कुमार, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी
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