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Shamli News: एशिया की नामचीन शामली शुगर मिल को लग गई किसकी नजर

Wed, 22 Nov 2023 12:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली जर्जर हालत में शुगर मिल का बायलर
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शामली। एशिया की नामचीन शुगर मिलो में गिनी जाने वाली शामली की अपर दोआब शुगर मिल नए सत्र में पिछले 92 दिन से किसानों के धरने के कारण शुरू नहीं हो पाई है। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी, लापरवाही के कारण समय पर भुगतान नहीं होने से पिछले दस साल से मिल से जुड़े किसान बकाया भुगतान के लिए धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर है। हर बार उन्हें धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के बाद ही बकाया भुगतान दिया जाता है। इस बार बकाया भुगतान के लिए किसान 92 दिन से धरने पर है मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हो सका है। पहले जिस शुगर मिल को गन्ना देने पर किसान फक्र महसूस करते थे, आज उसी शुगर मिल को गन्ना देने पर किसान कतरा रहा है। पिछले कई साल का इतिहास देखा जाए तो अभी तक का 92 दिन का किसानों का यह आंदोलन सबसे बड़ा है। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि बकाया भुगता नहीं होने तक उनका आंदोलन रहेगा, वे पीछे हटने वाले नहीं है।
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वर्ष 1931 में हुई थी चीनी मिल की स्थापना

अपर दोआब शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1931 में की गई थी। जबकि मिल 1933 में चालू हुई थी। मिल से करीब 75 हजार शामली और आसपास क्षेत्र के किसान जुड़े हुए हैं। मिल की पेराई क्षमता करीब 75 हजार क्विंटल है, जिसमें से मिल 50 हजार क्विंटल से अधिक की पेराई करता है। मिल एशिया की सबसे पुरानी मिलो में गिनी जाती है।

चीनी के रेट गिरे तब खराब हुई थी मिल की स्थिति
किसान नसीम, मामचंद का कहना है कि करीब दस साल पूर्व चीनी के रेट अचानक ही कम हो गए थे। जिसके बाद से शामली शुगर मिल की हालत खराब होनी शुरू हो गई थी। इसके अलावा मिल के जो बाॅयलर हाउस और अन्य उपकरण है, वह पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, जिसके कारण चलने के बाद समय-समय पर मिल में खराबी आती रहती है। इससे पेराई सत्र प्रभावित होता है। इस साल भी मिल पर किसानों का 221 करोड़ रुपये बकाया है।, जिसके लिए किसान रात दिन एक कर धरने पर जमा है।
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पूर्व में किसानों द्वारा बकाया भुगतान को लेकर किए गए आंदोलन
- वर्ष 2017 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 17 दिन तक धरना दिया था।
-वर्ष 2018 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसानों ने कलक्ट्रेट पर 19 दिन तक धरना दिया था। जिसके बाद किसानों को बकाया 120 करोड़ का भुगतान दिया गया था।
-वर्ष 2018 में ही बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 12 दिन तक धरना दिया था।

2020 में 13 से 30 जनवरी तक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर धरना दिया ।

: 2022 में तहसील में किसानों ने 6 दिन तक धरना दिया था।

किसान बोले, यह हो सकता है बकाया भुगतान के लिए समाधान



किसान नेता संजीव शास्त्री का कहना है कि प्रशासन और सरकार किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए कतई गंभीर नहीं है। इसका एक समाधान यह है कि मिल को बेचकर किसानों का रुपया देना चाहिए, मिल ऐसे शख्स की सुपुर्दगी में चलवाया जाए, जो 14 दिन के अंदर ही भुगतान करें। मिल चलने से पहले संपूर्ण बकाया भुगतान हो।



रज्जाकनगर निवासी किसान जितेंद्र तोमर का कहना है कि यदि मिल मालिक किसानों का बकाया भुगतान नहीं करा पा रहा है तो मिल को बेचकर किसानों का भुगतान करना चाहिए। मिल को ऐसे व्यक्ति को बेच दिया जाए जो किसानों का भुगतान भी कर सके। संपूर्ण भुगतान के बाद किसानों को 14 दिन में गन्ने का पेमेंट दिया जाए।



भैंसवाल गांव के किसान कमलवीर ने बताया कि पिछले साल के उनके करीब छह लाख रुपये मिल पर बकाया है। कहा कि मिल प्रशासन को जल्द से जल्द संपूर्ण भुगतान करना चाहिए, ताकि किसान अपने गेहूं की बुवाई समय से कर सके।



किसान बिरेंद्र सिंह का कहना है कि बकाया गन्ने का मिल पर करीब तीन लाख रुपये बकाया है। मिल को बेचकर सभी का भुगतान किया जाए और मिल को किसी ओर की सुपुर्दगी में देकर चलवाया जाए। यही नहीं 14 दिन के अंदर किसानों का बकाया भुगतान हो।

तलवा माजरा गांव के किसान राजपाल मलिक का कहना है कि मिल प्रशासन जान बूझकर किसानों का बकाया भुगतान नहीं दे रहा है। 27 नवंबर को पोती की शादी है, कैसे करुंगा, समझ नहीं आ रहा। किसानों को चीनी बेचकर फिलहाल भुगतान मिल अधिकारियों को करना चाहिए।
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किसानों को संपूर्ण बकाया गन्ना भुगतान दिलाने के लिए मिल के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। प्रयास रहेगा कि किसानों की समस्या का समाधान कराया जाए।

- संतोष कुमार, एडीएम शामली
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