अमर उजाला पड़ताल....
- शिक्षा विभाग ने जनपद के 182 स्कूलों में चालू की थी स्मार्ट क्लास व लाइब्रेरी, संसाधन नहीं
- जनपद के 30 से अधिक स्कूलों में एलईडी, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर की सुविधा, वह भी पड़े खराब
- लाइब्रेरी पर लगे रहते हैं ताले, स्मार्ट क्लास में पढ़ाने के बाद भी नहीं बता पाए छात्र कुछ भी
दीपक गुप्ता
शामली। कंप्यूटर के युग में स्कूलों को हाइटेक करने की तरफ शिक्षा विभाग कदम उठा रहा है, लेकिन उनके पास संसाधन की सुविधा तक नहीं है। बजट के नाम पर झोली भी खाली है। ऐसे में कैसे बच्चों को हाइटेक किया जा सकेगा जब स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए एलईडी, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर तक की सुविधा नहीं है और इसके अलावा भी कई संसाधनों का अभाव है। ऐसे में बच्चों को भौतिक व देश की गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल सकेगी।
आज देश जहां कंप्यूटर युग की तरफ बढ़ रहा है, वहीं सरकारी स्कूलों की स्मार्ट क्लास इससे कोसो दूर नजर आती हैं। जनपद के 182 स्कूलों में शिक्षा विभाग ने स्मार्ट क्लास बनाई और वहां लाइब्रेरी की व्यवस्था की। लाइब्रेरी में कुछ पुस्तक ही छात्रों के लिए मौजूद हैं, जिन्हें छात्र-छात्राएं पढ़ने की तरफ रूचि तक नहीं लेते हैं। स्कूल में बनी स्मार्ट क्लास में सुविधा के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता है। जिन स्कूलों में एलईडी व प्रोजेक्टर है वहां छात्र-छात्राओं को भूगोल की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग कराई जाती हैं। जैसे गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी आदि विषयों की कक्षा के अनुसार पढ़ाया जाता है। इसके लिए अलग-अलग शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।
जनपद के मात्र 30 स्कूलों में ही प्रोजेक्टर, एलईडी व कंप्यूटर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य में छात्र-छात्राओं के लिए कोई सुविधा तक नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार की तरफ जा रहा है और ऐसे में वह हाइटेक कैसे होंगे।
अमर उजाला पड़ताल में ये स्थिति आई सामने
स्थान: लिलौन गांव का उच्च प्राथमिक स्कूल
उच्च प्राथमिक स्कूल में स्मार्ट क्लास संचालित है। यहां पर प्रोजेक्टर खराब पड़ा। एलईडी को मोबाइल से जोड़कर पढ़ाया जाता है। प्रधानाध्यापिका उपमा शर्मा ने बताया कि एलईडी भी ट्रस्ट के माध्यम से ली गई थी और प्रोजेक्टर वह अपने पैसे से लाई थी। शासन व शिक्षा विभाग से किसी भी तरह का बजट नहीं दिया जाता है। लाइब्रेरी में छात्राएं किसी भी समय पढ़ाई कर सकती हैं। इसके लिए सभी शिक्षिकाओं को अलग-अलग जिम्मेदारी दे रखी है, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो सकें।
स्थान : बलवा गांव का उच्च प्राथमिक स्कूल
उच्च प्राथमिक स्कूल में स्मार्ट क्लास संचालित है। यहां एलईडी लगी है और एक कमरे में छात्रों को ग्रुप में बुलाकर भूगोल, पृथ्वी से जुड़ी जानकारी दी जाती है। लाइब्रेरी में ताला लगा हुआ था, जो काफी कम खुलता है। प्रधानाध्यापक बिजेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने एलईडी अपने पैसे से लगवाई है और जो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं वह भी खुद के खर्चे से लगे हैं। स्मार्ट क्लास बनाने के लिए कोई भी बजट नहीं आया है।
यह बाेले छात्र
छात्र शाहरुख ने बताया कि वह एलईडी के माध्यम से भौगोलिक जानकारी लेते हैं। स्मार्ट क्लास में उनको बताया जाता है कि पृथ्वी कैसे घूमती है और वह उनसे कितनी दूर है। किरणों के बारे में भी बताया जाता है।
छात्र बादल को स्मार्ट क्लास में कुछ भी समझ में नहीं आता है। वह किसी भी तरह की जानकारी नहीं दे सका। वह रोजाना स्मार्ट क्लास में जाता है, लेकिन उसको यह नहीं पता था कि उसको वहां क्या पढ़ाया जाता है।
इन्होंने कहा...
कुछ ही स्कूलों में प्रोजेक्टर, एलईडी व कंप्यूटर की व्यवस्था है और जनपद के सभी स्कूलों में यह व्यवस्था नहीं है। 182 स्कूलों को स्मार्ट क्लास से संचालित किया जा रहा है। प्रधानाध्यापकों को प्रधान या अन्य किसी ट्रस्ट के माध्यम से प्रोजेक्टर, एलईडी व कंप्यूटर लगाने के लिए कहा गया है। शासन से भी बजट की मांग की गई है, ताकि यहां व्यवस्था को शुरू किया जा सकें। - कोमल बीएसए शामली