फसलों की प्यास बुझाने वाला रजबहा पानी को तरसा
शामली, गढ़ीपुख्ता। क्षेत्र के गांव बुंटा सहित करीब चार दर्जन गांवों की फसलों की प्यास बुझाकर उन्हें जीवनदान देने वाला रजबहा खुद पानी के लिए तरस रहा है। रजबहा छह महीने से सूखा पड़ा है। रजबहे में पानी न आने से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सहारनपुर के नानौता स्थित पूर्वी यमुना नहर से निकल रहा रजबहा गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव बुंटा से होता हुआ झिंझाना के कई गांवों को भी जोड़ता है। इस रजबहे की जद में दर्जनों गांव आते हैं, जहां के किसान रजबहे के पानी से अपनी कई हजार एकड़ की फसलों को सींचते हैं। फसलों की प्यास बुझाकर उन्हें नया जीवनदान देने वाला यह रजबहा पिछले करीब छह माह से खुद पानी की बाट जोह रहा है। किसानों का आरोप है कि छह माह से रजबहे की न तो सफाई कराई गई और न ही इसमें पानी छोड़ा गया। जिससे उन्हें अपनी फसलों की सिंचाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस समय गेहूं, ईख और आलू की बुवाई चल रही है। रजबहे में पानी न आने से किसानों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है। वहीं बिजली आपूर्ति की स्थिति भी बेहद खराब है। बिजली न आने से ट्यूबवेल भी नहीं चल रहे हैं, जिससे फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है।
भाटू के पूर्व प्रधान गौरव चौहान से दो-तीन दिन पूर्व डीएम को प्रार्थना पत्र देकर रजबहे में पानी छुड़वाने की मांग की थी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पूर्व प्रधान गौरव चौहान ने बताया कि इस रजबहे से गांव गंदेवड़ा, पलठेड़ी, मानकपुर, बुंटा, गुराना, खेडागदाई, भाटू, दुल्लाखेड़ी, खेड़की, खेड़ाभाऊ, अंबेहटा हसनपुर, ताना, पुरमाफी सहित दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं, लेकिन छह माह से रजबहे में पानी न आने के कारण इन गांवों के किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से रजबहे की सफाई कराकर उसमें जल्द पानी छुड़वाने की मांग की है।