शामली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवकों ने शहर के मुख्य मार्गों पर पूर्ण गणवेश में अनुशासित तरीके से पथ संचलन किया। पथ संचलन के दौरान मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वयं सेवकों का स्वागत किया।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना दिवस और विजय दशमी के उपलक्ष्य में स्वयं सेवकों ने शहर में पथ संचलन किया। पथ संचलन से पूर्व माजरा रोड स्थित बैंक्वेट हॉल में संघ के सेवा विभाग प्रमुख ब्रिजेश ने बताया विजय दशमी के दिन 1925 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना डॉ. हेड़गेवार द्वारा की गई थी। उन्होंने बताया कि संगठन समाज का सहयोग और हिंदुओं को संगठित करता है। डॉ. हेडगेवार जन्मजात देश सेवक रहे और उन्होंने संगठन की स्थापना कर देश सेवा का बीड़ा उठाया। माजरा रोड से शुरू हुआ पथ संचलन टंकी रोड, रेलवे फाटक, धीमानपुरा भिक्की मोड़, गांधी गंज मंडी, तालाब रोड, मिल रोड, अग्रसेन पार्क, शिव चौक, बड़ा बाजार, अजुध्या चौक, मोहल्ला गुजारितयान, गोशाला रोड बैंड मार्किट होते हुए माजरा रोड बैंंक्वेट हॉल पर पहुंचकर संपन्न हुआ। पथ संचलन के दौरान मार्ग में जगह-जगह पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वयं सेवकों का स्वागत किया।
पथ संचलन में नगर कार्यवाह सुमित, सह नगर कार्यवाह आशीष, नगर बौद्धिक प्रमुख राकेश, सह नगर बौद्धिक प्रमुख मलूक, नगर शारीरिक प्रमुख अमित, सह नगर शारीरिक प्रमुख राजकुमार, जिला सेवा प्रमुख देशपाल, सह जिला संपर्क प्रमुख भरत, अतुल, मोहित, राजकुमार, कविंद्र, अतुल, प्रधानाचार्य संजय सैनी, आनंद प्रसाद शर्मा, नगर संघचालक आदेश, प्रवेश शर्मा, जयदेव संगल, घोष प्रमुख शिवकुमार धीमान, प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार, दीपक गुप्ता, ध्रुव मित्तल व गुलशन राय आदि मौजूद रहे।
छात्राओं की झांकी रही आकर्षण का केंद्र
पथ संचलन कार्यक्रम में शहर के सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की छात्रा दिव्या शर्मा, राधिका, अनंत, रेशम शर्मा ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार व द्वितीय सरसंघचालक माधव राव सदाशिव गोलवलकर गुरु जी और भारत माता की सुंदर झांकी प्रस्तुत की। इस दौरान कॉलेज की शिक्षिकाओं कविता गुप्ता, गीता कांबोज, पंकज बंसल, अनीता मलिक, सुरभि मित्र, नीलम पाल, दिव्या शर्मा, उपासना बंसल आदि ने पुष्प वर्षा व देश भक्ति गीत के माध्यम से पथ संचलन में सम्मिलित सभी स्वयं सेवकों का भव्य स्वागत किया। यह झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।