शामली। जिला अस्पताल में लगे वेंटिलेटर सिर्फ मॉक ड्रिल के दौरान ही काम आए हैं, जबकि हकीकत में ये आज तक मरीजों के काम नहीं आए, जिस कारण मरीजों को इनका आज तक लाभ नहीं मिल पाया।
कोराना काल में गंभीर मरीजों के उपचार के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड से जिला अस्पताल को 28 वेंटिलेटर मिले थे। सभी वेंटिलेटर जिला अस्पताल में लगे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि सभी वेंटिलेटर चालू हालत में है, लेकिन फिजिशियन, निश्चेतक और तकनीशियन न होने से ये चलाए नहीं जा रहे हैं। वेंटिलेटर की हकीकत ये है कि मरीजों को आज तक इनका लाभ नहीं मिल पाया। इतना जरूर हुआ कि कोराना काल में या उसके बाद जब भी मॉक डि्रल हुई, उस दौरान जरूर इनका इस्तेमाल किया गया। हकीकत में जब कोई मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचता है तो चिकित्सीय स्टाफ हाथ खड़े कर देते है और गंभीर हालत में मरीजों को मेरठ मेडिकल रेफर कर दिया जाता है।
दुर्घटना में घायलों को किया मेरठ रेफर
बुधवार रात को बाइक से फिसलकर सड़क पर गिरकर घायल हुए राजीव को इमरजेंसी में लाया गया। उसके सिर में गंभीर चोट थी और हड्डी फ्रेक्चर थी। उसे प्राथमिक उपचार के बाद मेरठ मेडिकल रेफर किया गया। बृहस्पतिवार को बाइक फिसलने के कारण उस पर सवार बुढ़ाना निवासी फिरोज और उसकी सास गांव कुरावा निवासी रहीशा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। इन दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल न भेजकर सीधे मेरठ मेडिकल रेफर किया गया।
ये बोले नागरिक
हिमांशु खैवाल ने कहा कि जिला अस्पताल में जब वेंटिलेटर है तो सरकार को उन्हें चलाने व मरीजों के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति भी करनी चाहिए।
संजीव का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं देेने के दावे करती है, लेकिन अस्पतालों में चिकित्सकों के पद ही खाली पड़े हैं। चिकित्सक ही नहीं तो सुविधाएं कहां से मिले।
मुकेश कुमार ने कहा वेंटिलेटर मरीज के लिए बहुत उपयोगी है। इसकी जरूरत उस समय पड़ती है। अब अस्पताल में वेंटिलेटर तो है लेकिन मरीजों के लिए कोई लाभ नहीं मिल रहा।
जिला अस्पताल में लगे सभी वेंटिलेटर चालू हालत में है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से इन्हें चलाया नहीं जा रहा। चिकित्सकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए शासन को पत्राचार किया गया है।
डॉ. किशोर कुमार आहूजा, सीएमएस, जिला अस्पताल