लालच बढ़ा तो कैराना निवासी इकबाल काना, दिलशाद मिर्जा आदि ने तीन हजार रुपयों में कैराना की महिलाओं को पाकिस्तान भेजना शुरू किया। सारा खर्चा गठरी ठेकेदार का होता था। पाकिस्तान आने-जाने के तीन हजार मिलते थे। बदले में सोने की तस्करी होने लगी। बाद में पाकिस्तान से भारत पिस्टल लाने के लिए गठरी व्यवसाय की आड़ ली जाने लगी। 90 के दशक के अंत में भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए पाकिस्तान ने नकली नोटों का सहारा लिया। इकबाल काना भारत की सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए पाकिस्तान भाग गया।
वहीं पर रहकर भारत विरोधी काम करने लगा। एक समय था जब कैराना में दुकानदार प्रत्येक 500 रुपये के नोट को शक की नजर से देखते थे कि कही नोट नकली न हो। लेकिन नोटबंदी के बाद नए नोट बाजार में आने से नकली नोटों पर लगाम लग गई थी। लेकिन मेरठ में पकड़े गए नकली नोट के तार फिर से कैराना से जुड़ गए हैं।