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Shamli News: क्षय रोगी नियमित लें दवा, लापरवाही पड़ सकती है भारी

Sat, 21 Jan 2023 12:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। क्षय रोगी को नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए। बीच में दवा छोड़ने या उपचार में लापरवाही रोगी को भारी पड़ सकती है। इस तरह के रोगी सामान्य से मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) की श्रेणी में पहुंच जाते हैं, जिन्हें आठ माह से 24 माह तक इलाज कराना पड़ता है। जिले में लगभग 63 मरीज एमडीआर श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं।
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जिले में क्षय रोगियों की जांच और उपचार की नि:शुल्क सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। क्षय रोगियों को जिले की सभी सीएचसी पर बनाए गए डॉट सेंटर से दवा दी जाती है। साथ ही पोषण के लिए रोगी के बैंक खाते में शासन की तरफ से उपचार चलने तक 500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। 2022 में जिले में लगभग 3234 क्षय रोगी खोजे गए, जिनमें करीब 1309 रोगियों का उपचार चल रहा है, जबकि अन्य सभी रोगी उपचार के बाद ठीक हो गए। इनमें लगभग 63 क्षय रोगी एमडीआर श्रेणी में हैं।
एमडीआर श्रेणी में क्षय रोगियों पर सामान्य क्षय रोग की दवा बेअसर हो जाती है। इसकी वजह ये होती है कि क्षय रोगी नियमित रूप से दवा नहीं लेता और बीच-बीच में दवा छोड़ देते हैं। इससे रोगी की स्थिति गंभीर हो जाती है। सीएचसी के वरिष्ठ लैब पर्यवेक्षक रोहित कुमार ने बताया कि सामान्य क्षय रोगी का उपचार छह माह से 12 महीने तक चलता है, जबकि एमडीआर के क्षय रोगी का उपचार आठ माह से 24 माह तक चलता है। उन्होंने बताया कि क्षय रोगी को नियमित रूप से दवा लेकर उपचार कराना चाहिए। दवा को बीच-बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से रोगी को दवा बेअसर हो जाती है, जिससे रोगी एमडीआर श्रेणी में पहुंच जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि क्षय रोगी के उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवा उपलब्ध है। लक्षण नजर आने पर रोगी को जांच कराकर उपचार करना चाहिए।
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क्षय रोग के लक्षण
- तीन सप्ताह से अधिक खांसी होना।
- लगातार बुखार रहना, शाम को तेज होना
- छाती में दर्द रहना।
- भूख कम लगना।
- बलगम में खून आना।
- वजन कम होना।
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